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20 साल बाद भव्य आध्यात्मिक आयोजन ग्राम हतुनिया में एक बार फिर होने जा रहा है दिव्य और ऐतिहासिक आयोजन जहां स्वयं भगवान बाण चढ़ाने पधारते हैं — एक अद्भुत आस्था और श्रद्धा का संगम

Posted on March 19, 2026

चलो चलो हतुनिया धाम जहां बाण चढाने आते हैं स्वयं भगवान गांव हतुनिया में ऐतिहासिक दर्शन बाण

आयोजन महापर्व रामनवमी 27 मार्च 2026 वार शुक्रवार को
मनासा

जिला मुख्यालय नीमच से करीब 50 किलोमीटर दूर मनासा रामपुरा मार्ग पर, कुंडालिया के पास स्थित हतुनिया गांव जो कि सनातन की अद्भुत शक्ति, भावना और भक्ति के लिए प्रसिद्ध है, यहा 20 वर्षों के पश्चात रामनवमी के पावन पर्व पर चमत्कारीक श्री राम लक्ष्मण दरबार मंदिर पर भव्य दर्शन बाण का आयोजन 27 मार्च 2026 वार शुक्रवार को होने जा रहा है, प्राप्त जानकारी के अनुसार सैकड़ो वर्ष पूर्व गांव हतुनिया में श्री राम लक्ष्मण दरबार मंदिर का निर्माण कराया गया था ! उस समय लक्ष्मण साहब के परम भक्त मोड़ीराम जी व्यास एवं शंकर लाल जी ओझा अपने 5 साथियों के साथ जयपुर के समीप स्थित किशनगढ़ मूर्तियां लेने गए थे, वहां पर नागा साधुओं द्वारा विशेष शुभ मुहूर्त में पूर्व से ही संगमरमर की श्री राम लक्ष्मण एवं जानकी माता की मूर्तियां बनवाकर चार सप्ताह में कीमत अदा करके मूर्तियां ले जाने की कहकर चले गए लेकिन चार सप्ताह बाद जब नागा साधु वापस दुकानदार के पास ना आए तो दुकानदार द्वारा उक्त मूर्तियों को मोड़ीराम जी की जिद पर गांव हतुनिया के पंचों को विक्रय कर दिया गया, जो पंचो द्वारा हतुनिया लाकर एक घर में रख दी गई थी इसी बीच नागा साधुओं ने जब दुकानदार से जाकर मूर्तियां मांगी तो दुकानदार ने उनको बेचने की जानकारी दी तथा नागा साधुओं के द्वारा गांव हतुनिया को ढूंढते हुए ग्राम वासियों से उक्त मूर्तियों को वापस देने की कहा गया जिस पर ग्रामीणों द्वारा मना करने पर नागा साधु और उनके आदमियों ने उक्त मकान में सेंध लगाकर रात्रि में मूर्तियां बाहर निकलना चाहि तब मोड़ीराम जी व्यास एवं शंकर लाल जी ओझा को स्वप्न में शेषावतार लक्ष्मण जी द्वारा श्री राम जी की एवं अन्य मूर्तिया चोरी होने की बात कही गई, जिस पर ग्रामीणों द्वारा मूर्तियां चोरी करने आए नागा साधुओं को पकड लिया गया इसके पश्चात उनमें से एक प्रमुख नागा साधु द्वारा बताया गया कि श्री लक्ष्मण साहब की मूर्ति में शेषावतार भगवान लक्ष्मण साहब का अंश आ चुका है साथ ही ग्रामीणों की सहायता से सन 1753 में मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा की गई! सभी नागा साधुओं द्वारा एक लकड़ी का बाण ग्रामीणों को दिया गया एवं पहली बार विधि विधान के साथ बाण चढ़ाया गया बाण चढ़ाने के लिए लक्ष्मण साहब से प्रार्थना की जाती है, जिसमें लाल वस्त्र पर अक्षत लेना मूर्ति से एक फूल पूजा की थाली में आना एवं दिनांक के आधार पर
रामचरितमानस के श्लोक का अर्थ निकालना शामिल होता है जो आज भी अनुमति लेना का एक मात्र विकल्प है, लक्ष्मण साहब द्वारा अनुमति प्रदान किए जाने के पश्चात दर्शन बाण के आयोजन की तैयारी शुरू की जाती है, आयोजन में वेद पाठ एवं धार्मिक अनुष्ठान के साथ रात्रि अभिषेक किया जाता है तत्पश्चात मूर्तियों को अपने स्थान पर स्थापित कर श्रृंगार का आयोजन किया जाता है, एवं प्रातः आरती के पश्चात ग्राम पटेल की उद्घोषणा के साथ 300 वर्ष पुराने बाण को मंदिर परिसर से बाहर लाया जाता है इसके पश्चात मामा भांजे की जोड़ी जो की सबसे पवित्र रिश्ता माना गया है 18, 18 कुल 36 फीट की दूरी पर चार फीट के चाप के साथ डोरिया डालकर खड़ी कर दी जाती है, भक्ति श्रद्धा और भावना का अनोखा संगम देखा जाता है श्री लक्ष्मण साहब के जोरदार जयकारे के साथ यज्ञ शुरू किया जाता है आहुतियां दी जाती है, और भक्त के बस में है भगवान की कथा को चरितार्थ करते हुए जैसे-जैसे जय घोष और जयकारे की आवाज बढ़ती जाती है एवं सभी भक्तजनों की भावना एकमत हो जाती है, तब अचानक से निर्जीव पड़े बास के चाप एवं डोरियों में हलचल पैदा होना शुरू हो जाती है इसी के साथ मंदिर में विराजित श्री लक्ष्मण साहब की प्राचीन चमत्कारीक मूर्ति पर पसीने की बूंदे सहज ही चमकने लगती है, मान्यता अनुसार लक्ष्मण साहब के स्वयं आने पर मूर्ति से भारी मात्रा में पसीना बहने लगता है जो प्रत्यक्ष रूप से विज्ञान को भी चुनौती देता है, क्योकि श्री लक्ष्मण साहब की मूर्ति के अलावा अन्य किसी मूर्ति पर कोई हलचल नहीं होती है जैसे-जैसे भक्त जनों का जयकारा बढता जाता है मामा भांजे के गले में डाली गई निर्जीव डोरियां और चाप स्वयं सजीव हो बिना छुए या कुछ किए हवा में आना शुरू हो जाती है, जय घोष के साथ उक्त चाप और डोरियां खुद ब खुद चमत्कारिक रूप से बाण पर आकर टिक जाती है यह अकल्पनीय अविश्वसनीय अद्भुत चमत्कार हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में होता है ग्रामीणों से प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2006 में उससे पूर्व 1983 में 1971 में उक्त आयोजन संपन्न हुआ था! यह सनातन की ही शक्ति है कि जहां विज्ञान फेल हो जाता है वहां हतुनिया गांव का श्री राम लक्ष्मण दरबार मंदिर इसी आस्था, भक्ति और सनातन के चमत्कार का प्रतीक बन चुका है आगामी 27 मार्च 2026 वार शुक्रवार रामनवमी के पावन पर्व पर इस भव्य आयोजन का फिर से आयोजन किया जा रहा है, जो कि सिर्फ रामनवमी एवं शुक्रवार के पावन अवसर पर ही होता है उक्त आयोजन ना सिर्फ गांव हतुनिया के लिए बल्कि समस्त अंचल के लिए कल्याणकारी एवम हर्ष का विषय है इस आयोजन हेतु ग्राम वासी हतुनिया एवं समीप गांव आमदखेड़ी, भगोरी, कुंडालिया, धाऊखेड़ी, बरलाई, कड़ी खुर्द, कड़ी बुजुर्ग एवं क्षेत्र के सभी श्री राम लक्ष्मण दरबार के भक्तजनों के सहयोग के द्वारा किया जा रहा है जिसमें लगभग 50000 से भी ज्यादा श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है सभी भक्तो जनों द्वारा समस्त भक्त प्रेमीयो से निवेदन किया गया है कि 27 मार्च 2026 को हतुनिया धाम पधारकर सनातन के इस अभूतपूर्व चमत्कार एवम भगवन श्री लक्ष्मण साहब के साक्षात दर्शन का लाभ लेवे जो स्वयं बाण चढाने पधारते है !

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