Skip to content
Zelo Electric Scooter
malwafirst.in
Menu
  • होम
  • अंतरराष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • मध्यप्रदेश
    • नीमच
    • मंदसौर
    • रतलाम
    • भोपाल
    • इंदौर
    • जबलपुर
    • ग्वालियर
  • राजस्थान
    • जयपुर
    • चित्तौड़गढ़
    • भीलवाड़ा
    • प्रतापगढ़
    • उदयपुर
    • कोटा
  • विविध
    • खेल
    • जीवन शैली
    • टेक
    • धर्म
    • बिज़नस
    • मनोरंजन
    • स्वास्थ्य
  • मंडी भाव
  • ई-पेपर
  • Video
Menu

13 साल बाद टूटीं कोमा की जंजीरें, हरीश राणा ने एम्स में ली आखिरी सांस

Posted on March 24, 2026

Harish Rana: भारत में निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति पाने वाले पहले व्यक्ति हरीश राणा का मंगलवार को दिल्ली एम्स में निधन हो गया है. वह पिछले 13 साल से अधिक समय से कोमा में थे. हरीश राणा को 14 मार्च को गाजियाबाद स्थित उनके घर से एम्स के डॉ.

बीआर आंबेडकर इंस्टीट्यूट रोटरी कैंसर अस्पताल की पैलिएटिव केयर यूनिट में भर्ती कराया गया था. वह साल 2013 से कोमा में थे. इससे तीन दिन पहले 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में हरीश राणा के लिए निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी. चौथी मंजिल से गिर गए थे हरीश राणा हरीश राणा पंजाब यूनिवर्सिटी में बीटेक के छात्र थे.

साल 2013 में वह चौथी मंजिल की बालकनी से गिर गए थे, जिससे उनके सिर में गंभीर चोटें आई थीं. इस हादसे के बाद से वह कोमा में थे. बीते 13 वर्षों से उन्हें कृत्रिम पोषण और जरूरत पड़ने पर ऑक्सीजन सपोर्ट दिया जा रहा था. अस्पताल में भर्ती किए जाने के बाद उनकी पोषण संबंधी सहायता को धीरे-धीरे बंद किया गया.

सुप्रीम कोर्ट ने एम्स-दिल्ली को निर्देश दिया था कि मरीज की गरिमा और सम्मान का पूरा ध्यान रखते हुए जीवन रक्षक सहायता को चरणबद्ध और सुनियोजित तरीके से हटाया जाए. विशेष मेडिकल टीम की निगरानी में पूरी हुई प्रक्रिया भारत में पहली बार निष्क्रिय इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) की प्रक्रिया लागू करने के लिए एम्स-दिल्ली में एक विशेष चिकित्सा टीम का गठन किया गया था.

इस टीम का नेतृत्व एनेस्थीसिया और पैलिएटिव मेडिसिन विभाग की प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. सीमा मिश्रा ने किया. इस विशेष टीम में न्यूरोसर्जरी, ऑन्को-एनेस्थीसिया, पैलिएटिव मेडिसिन और मनोचिकित्सा विभागों के डॉक्टरों को शामिल किया गया था. मरीज की स्थिति, गरिमा और कानूनी निर्देशों को ध्यान में रखते हुए पूरी प्रक्रिया को चिकित्सकीय निगरानी में अंजाम दिया गया.

क्या है यूथेनेशिया या इच्छामृत्यु का अधिकार? सुप्रीम कोर्ट ने आर्टिकल 21 के तहत हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) का अधिकार दिया. सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इसे संवैधानिक मान्यता दी. इसके तहत किसी व्यक्ति को यह अधिकार होता है कि वह लिविंग विल बना सकता है, जिसमें यह निर्देश दे सकता है कि अगर वह दीर्घकालिक वेजीटेटिव स्टेट में हो, तो उसे लाइफ सपोर्ट पर न रखा जाए.

भारत में केवल निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति है. इसका अर्थ है कि जब कोई व्यक्ति पूरी तरह से लाइलाज हो जाता है, तब उसके जीवन रक्षक उपकरणों को चिकित्सकीय निगरानी के तहत हटाया जा सकता है. Also Read: सरकार ने कहा- देश में फ्यूल और गैस की कमी नहीं, पैनिक बाइंग न करें.

शेयर करें: WhatsApp Facebook

इस खबर को शेयर करें:

WhatsAppFacebook

यूट्यूब लाइव न्यूज़

▶️
Malwa First YouTube

क्षेत्र की तमाम वीडियो खबरें और लाइव अपडेट्स सबसे पहले देखें।

Subscribe Channel

फेसबुक अपडेट्स

Follow on Facebook

Recent Posts

  • छात्रावास की सुविधा से हरीश की पढ़ाई को मिली नई उड़ान
  • नवम राष्ट्रीय पोषण माह के तहत जिले में पोषण एवं नशा मुक्ति जागरूकता के विभिन्न कार्यक्रम किए गए आयोजित
  • चलित खाद्य प्रयोगशाला ने विद्यार्थियों को मिलावट की पहचान और स्वस्थ खान-पान के प्रति किया जागरूक
  • अवैध मदिरा के विरुद्ध आबकारी विभाग की बड़ी कार्रवाई
  • सेवा संकल्प अभियान के तहत 17 सितंबर को 50 हजार दीपों से जगमगाएगा किलेश्वर महादेव मंदिर परिसर

Recent Comments

  1. A WordPress Commenter on Hello world!
©2026 malwafirst.in | Design: Newspaperly WordPress Theme