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बंगाल में दुर्गा पूजा के 400 करोड़ के सरकारी अनुदान पर संकट! शुभेंदु अधिकारी की एक घोषणा से सहमीं 44000 कमेटियां

Posted on June 4, 2026

खास बातें 4 महीने बाद है बंगाल का सबसे बड़ा उत्सव अतिक्रम विरोधी अभियान से भी बढ़ी टेंशन शुभेंदु सरकार का ‘नो रिलिजियस हैंडआउट फॉर्मूला’ 44,000 मोहल्ला पूजा पर सीधी मार सड़कों पर पंडाल लगाने पर कड़े नियम का डर हाईकोर्ट की गाइडलाइंस का पालन West Bengal Durga Puja: किससे गुहार लगाएं आयोजक? 80,000 करोड़ की पूजा इकोनॉमी को लग सकता है झटका West Bengal Durga Puja: पश्चिम बंगाल की राजनीति और सत्ता परिवर्तन का सीधा असर अब राज्य के सबसे बड़े उत्सव दुर्गा पूजा (Durga Puja) पर भी पड़ता दिख रहा है.

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी द्वारा राज्य में धार्मिक आधार पर दिये जाने वाले सरकारी भत्तों और खैरात को पूरी तरह बंद करने की घोषणा के बाद, बंगाल की छोटी और मध्यम बजट वाली पूजा कमेटियों के होश उड़ गये हैं. 4 महीने बाद है बंगाल का सबसे बड़ा उत्सव महज 4 महीने बाद होने वाले इस महा-उत्सव को लेकर कोलकाता सहित पूरे सूबे के पूजा आयोजक भारी अनिश्चितता और असमंजस के भंवर में फंसे हैं.

उनको अब समझ नहीं आ रहा कि उन्हें इस साल सरकार की तरफ से वित्तीय मदद मिलेगी या नहीं. अतिक्रम विरोधी अभियान से भी बढ़ी टेंशन इसके अलावा, राज्य सरकार द्वारा हाल ही में चलाये गये अतिक्रमण विरोधी अभियानों और सड़कों पर नमाज पढ़ने पर लगायी गयी पाबंदियों के बाद, सड़कों और गलियों में बनने वाले पंडालों की अनुमति को लेकर भी पूजा कमेटियों में भारी खौफ और बेचैनी है.

इसे भी पढ़ें : दुर्गा पूजा में 32 हजार करोड़ रुपये से अधिक का होता है कारोबार शुभेंदु सरकार का ‘नो रिलिजियस हैंडआउट फॉर्मूला’ ममता बनर्जी सरकार के दौरान वर्ष 2018 में पूजा कमेटियों को 10,000 रुपए की मामूली आर्थिक सहायता से शुरू हुआ यह सफर पिछले साल यानी वर्ष 2025 तक बढ़कर 1.1 लाख रुपए प्रति कमेटी तक पहुंच गया था.

पूजा कमेटियों को इस ग्रांट पर सरकारी खजाने से 400 करोड़ से अधिक का भुगतान किया गया. बिजली बिल में 80 फीसदी की भारी छूट, फायर लाइसेंस फीस और केएमसी टैक्स माफी को जोड़कर बड़े पंडालों को करीब 2 लाख रुपए तक का अप्रत्यक्ष फायदा मिलता था. बंगाल की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें 44,000 मोहल्ला पूजा पर सीधी मार फोरम फॉर दुर्गोत्सव के उपाध्यक्ष साश्वत बोस ने इस गंभीर स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा- राज्य की कुल 45,000 सामुदायिक पूजा में से लगभग 44,000 कमेटियों का कुल बजट 10 लाख से कम होता है.

इन छोटी कमेटियों के लिए सरकारी अनुदान उनके कुल बजट का 20 से 40 प्रतिशत तक होता है. अगर यह मदद रुकी, तो महंगाई के इस दौर में उनके लिए आयोजन करना असंभव हो जायेगा. सड़कों पर पंडाल लगाने पर कड़े नियम का डर आर्थिक संकट के साथ-साथ आयोजकों के सामने दूसरी सबसे बड़ी चुनौती पंडालों की भौगोलिक स्थिति को लेकर खड़ी हो गयी है.

हाल ही में नयी सरकार ने राज्य भर में सड़कों को खाली कराने और सार्वजनिक स्थानों से अवैध अतिक्रमण हटाने की मुहिम शुरू की है. इसके साथ ही सड़कों पर शुक्रवार की नमाज रोके जाने के प्रशासनिक फैसले के बाद, पूजा आयोजक असमंजस में हैं कि क्या उन्हें सड़कों और संकरी गलियों में पंडाल बनाने की अनुमति मिलेगी.

इसे भी पढ़ें : दुर्गा पूजा से पहले बंगाल में 24,500 शिक्षकों को सरकारी नौकरी, 7,500 को मार्च तक मिलेगा नियुक्ति पत्र, ममता की बड़ी घोषणा हाईकोर्ट की गाइडलाइंस का पालन कलकत्ता हाईकोर्ट ने पहले ही कई बार सख्त निर्देश दिये हैं कि पूजा पंडालों के कारण आम जनता और यातायात को पूरी तरह ठप नहीं किया जा सकता.

पुराने नियमों के मुताबिक, पंडाल के दोनों तरफ कम से कम 20 फीट की सड़क यातायात और आपातकालीन वाहनों (एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड) के लिए खाली छोड़नी अनिवार्य है. संकरी सड़कों पर दो-तिहाई हिस्सा खुला रखना होता है. आयोजकों को डर है कि इस बार पुलिस इन नियमों को लेकर कोई ढील नहीं देगी.

West Bengal Durga Puja: किससे गुहार लगाएं आयोजक? दुर्गोत्सव के आयोजन को लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी एक बड़ा शून्य पैदा हो गया है, जिसने आयोजकों की नींद उड़ा दी है. कोलकाता के एक मशहूर और भारी भीड़ खींचने वाले पूजा पंडाल के मुख्य आयोजक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि ममता बनर्जी के शासनकाल में केवल एक ही व्यक्ति (ममता) सारे फैसले लेती थीं.

हम सीधे उनसे संपर्क कर लेते थे. नयी सरकार में अभी तक सूचना और सांस्कृतिक मामलों (Information & Cultural Affairs) के मंत्रियों को विभागों का औपचारिक बंटवारा नहीं हुआ है. 80,000 करोड़ की पूजा इकोनॉमी को लग सकता है झटका फोरम फॉर दुर्गोत्सव के संस्थापक पार्थ घोष के मुताबिक, बंगाल में दुर्गा पूजा के आसपास का पूरा कारोबार लगभग 75,000 से 80,000 करोड़ रुपए का है.

यह राज्य की कुल जीडीपी (GDP) का 5 प्रतिशत है. बड़े और कॉरपोरेट बजट वाले करीब 500 पूजा आयोजकों का कहना है कि वे तो बिना सरकारी मदद के भी स्पॉन्सरशिप के दम पर अपना बजट संभाल लेंगे, लेकिन छोटे क्लबों के बजट रुकने से पंडाल बनाने वाले मजदूरों, मूर्तिकारों (कुम्हारों), ढाकियों (ढोल बजाने वालों) और स्थानीय छोटे दुकानदारों की कमाई पर बहुत बुरा असर पड़ेगा.

इसे भी पढ़ें Durga Puja 2020: पश्चिम बंगाल में मां दुर्गा का दर्शन करना मना है, हर पूजा पंडाल ‘कंटेंनमेंट जोन’, हाइकोर्ट का आदेश कोरोना वायरस को बताया महिषासुर राक्षस, दुर्गा पूजा समितियों ने प्रवासी कामगारों की दिक्कतों को बनाया विषय.

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