Skip to content
Zelo Electric Scooter
malwafirst.in
Menu
  • होम
  • अंतरराष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • मध्यप्रदेश
    • नीमच
    • मंदसौर
    • रतलाम
    • भोपाल
    • इंदौर
    • जबलपुर
    • ग्वालियर
  • राजस्थान
    • जयपुर
    • चित्तौड़गढ़
    • भीलवाड़ा
    • प्रतापगढ़
    • उदयपुर
    • कोटा
  • विविध
    • खेल
    • जीवन शैली
    • टेक
    • धर्म
    • बिज़नस
    • मनोरंजन
    • स्वास्थ्य
  • मंडी भाव
  • ई-पेपर
  • Video
Menu

भारतीय संस्कृति, परंपरा और भाषाओं के प्रति सम्मान का भाव विकसित करना विश्वविद्यालयों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी : राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु | जनजातीय समाज के सर्वांगीण विकास में शिक्षित युवाओं की भूमिका अहम राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु के मुख्य आतिथ्य में रानी

Posted on June 21, 2026

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि शिक्षण संस्थान केवल डिग्री देने के केंद्र नहीं, बल्कि नवाचार, अनुसंधान, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और रचनात्मक सोच के विकास के प्रमुख केंद्र होते हैं। विद्यार्थियों में भारतीय संस्कृति, परंपरा और भाषाओं के प्रति सम्मान का भाव विकसित करना भी विश्वविद्यालयों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

आधुनिकता और परंपरा के संतुलन से ही देश का समग्र विकास संभव है। राष्ट्र्पति श्रीमती मुर्मु रविवार को जबलपुर में रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के 36वें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहीं थी। इस अवसर पर राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने विभिन्न संकायों में एक से अधिक स्वर्ण पदक अर्जित करने वाले 20 छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक प्रदान किये और उपाधियों का वितरण किया।

कार्यक्रम में विश्व्विद्यालय के 141 विद्यार्थियों को 240 स्वार्ण पदकों का वितरण किया गया। साथ ही 182 शोधार्थियों को पीएचडी सहित विभिन्न उपाधियां प्रदान की। मंचीय कार्यक्रम के पूर्व महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने विश्विविद्यालय परिसर स्थित वीरांगना रानी दुर्गावती की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की।

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि जबलपुर विश्वविद्यालय का नाम वीरांगना रानी दुर्गावती के नाम पर होना गर्व का विषय है। रानी दुर्गावती वीरता, साहस, शौर्य और पराक्रम की प्रतिमूर्ति थीं और नारी शक्ति के लिए सदैव प्रेरणा स्रोत रहेंगी। उन्होंने महान वीरांगना की स्मृति को नमन करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय से जुड़े विद्यार्थियों और पूर्व छात्रों को जनजातीय समाज, वंचित वर्गों तथा विशेषकर बेटियों के सशक्तिकरण के लिए आगे आना चाहिए।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय जिस क्षेत्र में स्थित है, वहां जनजातीय और वनवासी संस्कृति की समृद्ध उपस्थिति है। ऐसे में यहां से शिक्षा प्राप्त करने वाले युवाओं का दायित्व केवल अपने करियर तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उन्हें अपने समाज और गांवों तक पहुंचकर वहां के लोगों का मार्गदर्शन भी करना चाहिए।

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि सरकार जनजातीय और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए अनेक योजनाएं चला रही है। कई बार लोगों को इन योजनाओं की जानकारी और उनका लाभ लेने की प्रक्रिया का पता नहीं होता। ऐसे में शिक्षित युवाओं, विशेषकर जनजातीय समाज से आगे बढ़े युवक-युवतियों का कर्तव्य है कि वे अपने समाज के बीच जाकर लोगों को मार्गदर्शन दें।

उन्होंने कहा कि विकसित भारत@2047 का सपना तभी साकार होगा, जब समाज के अंतिम व्यक्ति और पीछे छूटे समुदायों को भी विकास की मुख्यधारा में लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज की पहचान, संस्कृति, परंपरा और अस्मिता को बनाए रखना उतना ही आवश्यक है, जितना आधुनिक विकास में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना।

जनजातीय समाज के कौशल, पारंपरिक ज्ञान और शिल्प को आधुनिक शिक्षा, नवाचार और शोध से जोड़ने की आवश्यकता है। इस दिशा में विश्वविद्यालयों और अन्य शिक्षण संस्थानों को विशेष प्रयास करने चाहिए, जिससे जनजातीय ज्ञान परंपरा का व्यवस्थित अध्ययन हो सके और उसका लाभ व्यापक समाज तक पहुंचे।

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने विश्वविद्यालय में भारतीय ज्ञान परंपरा को पाठ्यक्रमों में समाहित करने, नवाचार को प्रोत्साहन देने तथा डिजाइन इनोवेशन सेंटर के माध्यम से पेटेंट प्राप्त करने जैसे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह प्रसन्नता की बात है कि दीक्षांत समारोह में स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में बेटियों की संख्या अधिक है, जो महिला सशक्तिकरण और बदलते भारत की सकारात्मक तस्वीर प्रस्तुत करती है।

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि आज का भारत युवाओं का भारत है और देश को उनसे बड़ी अपेक्षाएं हैं। केंद्र और राज्य सरकारें युवाओं को उनकी योग्यता के अनुरूप अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। विश्वविद्यालयों को चाहिए कि वे शिक्षा, शोध, नवाचार और कौशल विकास के माध्यम से युवाओं को आत्मनिर्भर और राष्ट्र निर्माण के लिए सक्षम बनाएं।

उन्होंने कहा कि आज विश्व तेजी से बदल रहा है और जीवनशैली में भी तीव्र परिवर्तन आ रहा है, लेकिन इस बदलते दौर में भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों को नहीं भूलना चाहिए। देश के युवाओं को भारत के सांस्कृतिक मूल्यों और आदर्शों को अपने जीवन का आधार बनाना चाहिए।

सत्य, अहिंसा, करुणा, सेवा और ईमानदारी जैसे मूल्य भारतीय चेतना का अभिन्न हिस्सा हैं। इन मूल्यों को जीवन में अपनाकर युवा न केवल कठिन परिस्थितियों का दृढ़ता से सामना कर सकते हैं, बल्कि आदर्श नागरिक बनकर राष्ट्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने विद्यार्थियों से कहा कि उनकी जिम्मेदारियां केवल परिवार या विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं हैं। वे राष्ट्र की आकांक्षाओं और भविष्य के निर्माता हैं। युवाओं के कंधों पर देश का भविष्य टिका है और उनके ज्ञान, ऊर्जा तथा संकल्प से विकसित भारत का सपना साकार होगा।

उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे अपनी शिक्षा और प्रतिभा का उपयोग केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित न रखते हुए समाज के व्यापक कल्याण के लिए भी करें। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि शिक्षित युवा अपने आसपास के वंचित, ग्रामीण और जनजातीय समुदायों की समस्याओं को समझें, उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप समाधान विकसित करें और उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं।

उन्होंने कहा कि आज जो विद्यार्थी विश्वविद्यालय से निकल रहे हैं, वे भविष्य में अधिकारी, प्रोफेसर, वैज्ञानिक, शोधकर्ता और विभिन्न क्षेत्रों के नेतृत्वकर्ता बनेंगे। ऐसे में उनका दायित्व और भी बढ़ जाता है कि वे समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए संवेदनशीलता के साथ कार्य करें।

रानी दुर्गावती आज भी जनजातीय समुदाय सहित देश की प्रत्येक बेटी और युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का केंद्र राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि विश्वविद्यालय के 36वें दीक्षांत समारोह का राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के मुख्य आतिथ्य में संपन्न होना हम सभी के लिए अत्यंत गौरव का विषय है।

उन्होंने अमर वीरांगना महारानी रानी दुर्गावती को नमन करते हुए कहा कि उनका जीवन जनजातीय अस्मिता, प्रजा कल्याण, नारी शक्ति, त्याग, पराक्रम, नेतृत्व क्षमता और आत्मगौरव का अमर संदेश है। उन्होंने कहा कि रानी दुर्गावती आज भी जनजातीय समुदाय सहित देश की प्रत्येक बेटी और युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का केंद्र हैं।

राज्यपाल श्री पटेल ने दीक्षांत समारोह में उपस्थित छात्र-छात्राओं से कहा कि उनकी डिग्री केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि विकसित भारत के निर्माण, नवाचार और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य को आकार देने वाली शक्ति है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे रानी दुर्गावती सहित देश के महान जननायकों के शौर्य, लोककल्याण और संघर्षपूर्ण जीवन से प्रेरणा लेकर समाज के प्रति अपने दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करें।

उन्होंने प्रत्येक विश्वविद्यालय से 5-5 पिछड़े ग्रामों को गोद लेने का आग्रह करते हुए कहा कि विद्यार्थी स्वयं इन ग्रामों में जाकर वहाँ की परिस्थितियों को समझें और अनुभव करें कि जनजातीय समाज और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए किन-किन क्षेत्रों में कार्य करने की आवश्यकता है।

इससे विद्यार्थियों में समाज सेवा की भावना, संवेदनशीलता और उत्तरदायित्व का विकास होगा। राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि केंद्र सरकार की अनेक जनकल्याणकारी योजनाएँ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने के उद्देश्य से संचालित की जा रही हैं। उन्होंने विशेष रूप से पीएम जनमन योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह अत्यंत पिछड़े जनजातीय समुदायों, विशेषकर बैगा, भारिया और सहरिया समाज के उत्थान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण योजना है।

उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में ऐसे लाखों लोग निवास करते हैं और उनके जीवन स्तर में सुधार के लिए केंद्र सरकार ने विशेष प्रावधान किए हैं। उन्होंने धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना सहित विभिन्न योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इनके लिए हजारों करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान किया गया है।

उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे अपने क्षेत्र और तहसीलों का ऐसा विकास मानचित्र तैयार करने में सहयोग करें, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि जनजातीय विकास एवं बुनियादी सुविधाओं से संबंधित कौन-कौन से कार्य अभी शेष हैं। इससे प्रत्येक गरीब और जरूरतमंद जनजातीय परिवार तक शासन की योजनाओं का लाभ प्रभावी रूप से पहुँचाया जा सकेगा।

राज्यपाल श्री पटेल ने विद्यार्थियों से कहा कि उनके माता-पिता ने उन्हें संस्कार दिए, उनका पालन-पोषण किया और विश्वविद्यालय ने उन्हें शिक्षा एवं आगे बढ़ने का अवसर प्रदान किया है। अब उनकी जिम्मेदारी है कि वे अपनी जड़ों और समाज को कभी न भूलें तथा राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाएँ।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विद्यार्थी अपने जीवन में सफलता प्राप्त करने के साथ-साथ समाज के लिए भी उपयोगी सिद्ध होंगे। उन्होंने कहा कि जब विद्यार्थियों के जीवन का एक नया अध्याय प्रारंभ हो रहा है, तब समय की मांग है कि वे महारानी रानी दुर्गावती से मिली प्रेरणा को अपने जीवन में आत्मसात करें और लोकतांत्रिक मूल्यों, नारी सशक्तिकरण तथा विकसित भारत के संकल्प को अपना जीवन ध्येय बनाकर राष्ट्र की उन्नति में अपना श्रेष्ठ योगदान दें।

रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में प्राप्त करेगा नई ऊंचाइयां : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु की गरिमामयी उपस्थिति ने रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के 36वें दीक्षांत समारोह को और अधिक गौरवशाली बना दिया है।

यह अवसर न केवल विश्वविद्यालय बल्कि सम्पूर्ण मध्यप्रदेश के लिए गर्व और गौरव का विषय है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय केवल उच्च शिक्षा का संस्थान नहीं है। यह वीरता, स्वाभिमान और बलिदान की उस गौरवशाली परंपरा का प्रतीक है, जिसे अमर वीरांगना रानी दुर्गावती ने अपने साहस और अदम्य पराक्रम से स्थापित किया।

उन्होंने कहा कि रानी दुर्गावती ने मुगल सम्राट अकबर की विशाल सेना के विरुद्ध अनेक युद्ध लड़कर अपनी असाधारण वीरता का परिचय दिया और मातृभूमि की स्वतंत्रता तथा सम्मान की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान देकर आने वाली पीढ़ियों के लिए अमर प्रेरणा का उदाहरण प्रस्तुत किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्वास व्यक्त किया कि रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा। यहां से निकलने वाली प्रतिभाएं देश और समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देंगी। उन्होंने कहा कि आज विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राएं अपनी प्रतिभा और उत्कृष्ट प्रदर्शन से प्रदेश का नाम राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित कर रहे हैं।

उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि अनेक विद्यार्थियों द्वारा एक से अधिक स्वर्ण पदक अर्जित करना प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और शैक्षणिक उत्कृष्टता का प्रमाण है। विशेष रूप से छात्राओं की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि बेटियों की सफलता न केवल परिवार बल्कि पूरे समाज और प्रदेश के लिए गर्व का विषय है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है और मध्यप्रदेश भी शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर प्रगति कर रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में उच्च शिक्षा की सकल नामांकन दर राष्ट्रीय औसत से अधिक होकर 28.9 प्रतिशत तक पहुंच गई है।

स्कूल शिक्षा में ड्रॉपआउट दर को शून्य के करीब लाने के प्रयास सफल रहे हैं। प्रदेश सरकार ने तीन नए शासकीय विश्वविद्यालयों की स्थापना की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को गुणवत्तापूर्ण, तकनीकी एवं रोजगारोन्मुख शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि कृषि प्रधान राज्य होने से प्रदेश में किसान कल्यारण वर्ष अंतर्गत कृषि एवं व्यावसायिक शिक्षा के साथ ही नवाचार आधारित अध्ययन को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है, जिससे युवा आधुनिक तकनीक के माध्यम से आत्मनिर्भर बन सकें और राष्ट्र निर्माण में अपनी प्रभावी भूमिका निभा सकें।

कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। इसके पश्चात कुलगुरु प्रो. डॉ. राजेश कुमार वर्मा ने स्मृति चिन्ह भेंट कर राष्ट्रपति, राज्यपाल, मुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री का स्वागत किया। स्वागत भाषण में कुलगुरु डॉ. वर्मा ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि विश्वविद्यालय ने पहली बार एनएएसी से A+ ग्रेड प्राप्त किया है, जो संस्थान के लिए गौरव का विषय है।

स्वर्ण पदक धारकों एवं उपाधि प्राप्तकर्ताओं का राष्ट्रपति, राज्यपाल, मुख्यमंत्री और उच्च शिक्षा मंत्री के साथ संयुक्त छायाचित्र समारोह का विशेष आकर्षण रहा। विद्यार्थियों ने इसे अपने जीवन की अविस्मरणीय उपलब्धि बताया। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार, राज्य सभा सांसद श्रीमती सुमित्रा वाल्मीक, सांसद श्री आशीष दुबे, महापौर श्री जगत बहादुर सिंह, विधायक सर्वश्री अशोक रोहाणी, डॉ. अभिलाष पांडे, नीरज सिंह, संतोष बरकड़े, लखन घनघोरिया, अखिलेश जैन, संभागायुक्त श्री धनंजय सिंह, कलेक्टार श्री राघवेन्द्र सिंह, पुलिस अधीक्षक श्री संपत उपाध्याय, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

शेयर करें: WhatsApp Facebook

इस खबर को शेयर करें:

WhatsAppFacebook

यूट्यूब लाइव न्यूज़

▶️
Malwa First YouTube

क्षेत्र की तमाम वीडियो खबरें और लाइव अपडेट्स सबसे पहले देखें।

Subscribe Channel

फेसबुक अपडेट्स

Follow on Facebook

Recent Posts

  • छात्रावास की सुविधा से हरीश की पढ़ाई को मिली नई उड़ान
  • नवम राष्ट्रीय पोषण माह के तहत जिले में पोषण एवं नशा मुक्ति जागरूकता के विभिन्न कार्यक्रम किए गए आयोजित
  • चलित खाद्य प्रयोगशाला ने विद्यार्थियों को मिलावट की पहचान और स्वस्थ खान-पान के प्रति किया जागरूक
  • अवैध मदिरा के विरुद्ध आबकारी विभाग की बड़ी कार्रवाई
  • सेवा संकल्प अभियान के तहत 17 सितंबर को 50 हजार दीपों से जगमगाएगा किलेश्वर महादेव मंदिर परिसर

Recent Comments

  1. A WordPress Commenter on Hello world!
©2026 malwafirst.in | Design: Newspaperly WordPress Theme