Skip to content
Zelo Electric Scooter
malwafirst.in
Menu
  • होम
  • अंतरराष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • मध्यप्रदेश
    • नीमच
    • मंदसौर
    • रतलाम
    • भोपाल
    • इंदौर
    • जबलपुर
    • ग्वालियर
  • राजस्थान
    • जयपुर
    • चित्तौड़गढ़
    • भीलवाड़ा
    • प्रतापगढ़
    • उदयपुर
    • कोटा
  • विविध
    • खेल
    • जीवन शैली
    • टेक
    • धर्म
    • बिज़नस
    • मनोरंजन
    • स्वास्थ्य
  • मंडी भाव
  • ई-पेपर
  • Video
Menu

2026 का शक्तिशाली अल-नीनो बढ़ा सकता है मौसम का खतरा, बारिश से गर्मी तक भारत पर क्या होगा असर?

Posted on August 23, 2026

प्रशांत महासागर में तेजी से बढ़ते समुद्री तापमान ने दुनियाभर के मौसम वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है. UK Met Office के मुताबिक, 2026 में बन रहा अल-नीनो अब तक के सबसे मजबूत अल-नीनो में से एक और संभवतः 19वीं सदी के बाद सबसे बड़ा हो सकता है. कितना मजबूत हो सकता है अल-नीनो? अल-नीनो में प्रशांत महासागर के बीच और पूर्वी हिस्से का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है.

इसका असर दुनिया के कई हिस्सों में बारिश और तापमान पर पड़ सकता है. UK Met Office के मुताबिक, मौजूदा अनुमान में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से 3°C से ज्यादा बढ़ सकता है. Met Office के प्रोफेसर एडम स्कैफ ने कहा कि उन्होंने अपने मौसम मॉडल में इससे पहले अल-नीनो का इतना मजबूत संकेत नहीं देखा.

NOAA का क्या अनुमान है? अमेरिकी मौसम एजेंसी NOAA के 13 अगस्त के अनुमान के मुताबिक, अक्टूबर से दिसंबर 2026 के दौरान बहुत मजबूत अल-नीनो बनने की 90% से ज्यादा संभावना है. NOAA के अनुसार, इस अवधि में 69% संभावना है कि यह 1950 के बाद दर्ज सबसे मजबूत अल-नीनो में शामिल हो सकता है.

ये भी पढ़ें: चीन के बाद दक्षिण कोरिया की आर्कटिक रूट पर एंट्री, क्या बदल जाएगा एशिया-यूरोप का समुद्री व्यापार? भारत में मानसून पर क्या असर पड़ेगा? भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता मानसून को लेकर है. IMD के मुताबिक, अल-नीनो अक्सर कमजोर मानसून से जुड़ा रहा है, लेकिन हर बार ऐसा हो, यह जरूरी नहीं है.

समुद्र और वातावरण की दूसरी स्थितियां भी मानसून को प्रभावित करती हैं. उदाहरण के लिए, 1997 में मजबूत अल-नीनो के बावजूद भारत में मानसून लगभग सामान्य रहा था. इसलिए मजबूत अल-नीनो का मतलब यह नहीं है कि भारत में सूखा पड़ेगा, लेकिन बारिश कम होने या उसके समय और जगह में बदलाव का खतरा बढ़ सकता है.

खेती पर बढ़ सकता है असर FAO के मुताबिक, अल-नीनो बारिश और तापमान में बदलाव करके खेती पर असर डाल सकता है. जून 2026 की FAO रिपोर्ट के अनुसार, अल-नीनो भारत के कई हिस्सों में मानसूनी बारिश को कमजोर कर सकता है. इससे बारिश पर निर्भर चावल और मक्का जैसी फसलों पर असर पड़ सकता है.

अगर बारिश कम होती है या सही समय पर नहीं होती, तो किसानों की पैदावार प्रभावित हो सकती है. ये भी पढ़ें: जनगणना 2027 के डाटा एंट्री कार्य का प्रशिक्षण, 30 अगस्त तक पूरा करना होगा काम क्या महंगा हो सकता है खाना? अल-नीनो से खाद्य कीमतों पर दबाव बढ़ने का खतरा है, लेकिन अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि चीजें निश्चित रूप से महंगी होंगी.

FAO ने भारत और थाईलैंड में गन्ने की पैदावार पर संभावित असर को वैश्विक चीनी आपूर्ति के लिए खतरा बताया है. वहीं, मजबूत अल-नीनो से दक्षिण-पूर्व एशिया की कॉफी और पश्चिम अफ्रीका के कोको उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है. वहीं, अगर कई देशों में फसल कम होती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्य वस्तुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है.

गर्मी भी बढ़ सकती है अल-नीनो वैश्विक तापमान को भी बढ़ा सकता है. UK Met Office के मुताबिक, मौजूदा अल-नीनो के कारण 2027 में दुनिया के औसत तापमान का नया रिकॉर्ड बन सकता है. FAO के अनुसार, पहले से बढ़ रही गर्मी के बीच मजबूत अल-नीनो से लू, सूखा और बारिश में बदलाव जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं..

शेयर करें: WhatsApp Facebook

इस खबर को शेयर करें:

WhatsAppFacebook

यूट्यूब लाइव न्यूज़

▶️
Malwa First YouTube

क्षेत्र की तमाम वीडियो खबरें और लाइव अपडेट्स सबसे पहले देखें।

Subscribe Channel

फेसबुक अपडेट्स

Follow on Facebook

Recent Posts

  • छात्रावास की सुविधा से हरीश की पढ़ाई को मिली नई उड़ान
  • नवम राष्ट्रीय पोषण माह के तहत जिले में पोषण एवं नशा मुक्ति जागरूकता के विभिन्न कार्यक्रम किए गए आयोजित
  • चलित खाद्य प्रयोगशाला ने विद्यार्थियों को मिलावट की पहचान और स्वस्थ खान-पान के प्रति किया जागरूक
  • अवैध मदिरा के विरुद्ध आबकारी विभाग की बड़ी कार्रवाई
  • सेवा संकल्प अभियान के तहत 17 सितंबर को 50 हजार दीपों से जगमगाएगा किलेश्वर महादेव मंदिर परिसर

Recent Comments

  1. A WordPress Commenter on Hello world!
©2026 malwafirst.in | Design: Newspaperly WordPress Theme