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संसार से भागने की अपेक्षा सजगता और सावधानी से सामना करो – मुनिश्री सुप्रभ सागर

रिपोर्टर: mawafirstnews@gmail.com
📅 28 Nov 2023, 06:22 AM
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संसार से भागने की अपेक्षा सजगता और सावधानी से सामना करो – मुनिश्री सुप्रभ सागर

सिंगोली। संसार से भागने की अपेक्षा सजगता और सावधानी से सामना करो। नदी अपने उद्‌गम से चलना प्रारंभ करती है तो वह एक समीचीन गति के साथ चलती है और बीच में आने वालों को साथ लेकर चलती है। यदि उसका वेग समीचीन नहीं हो तो वह अपनी मंजिल को नहीं पहुँच सकती है उसी प्रकार मनुष्य भव में जो संवेग अर्थात् समीचीन वेग से नहीं चले तो वह भी अपने लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकता है। यह बात नगर में चातुर्मास हेतु विराजमान मुनिश्री सुप्रभ सागर जी महाराज ने 27 नवंबर सोमवार को प्रातःकाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए कही।

मुनि श्री ने कहा कि, आचार्यों ने संवेग का अर्थ करते हुए कहा है कि धर्म और धर्म के फल में उत्साह होना, संसार के दुःखों से सदा भय‌भीत रहना। चलना अनिवार्य है, ठहरा हुआ व्यक्ति कभी भी लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकता है उसे चलना ही होगा पर कैसे चलना, कब चलना, कहाँ चलना, क्यों चलना इन प्रश्नों का उत्तर देते हुए कहाँ सजगता से, सावधानीपूर्वक चलना। संसार से भागने की अपेक्षा संसार में सजग, सावधान रहने की आवश्यकता है।जब तक मुक्ति नहीं हो जाती तब तक संसार में रहना ही पड़ेगा।

संसार में रहकर कर्तव्य से विमुत्व होने या पलायन करने की अपेक्षा कदम हर कदम सावधानीपूर्वक चलने की आवश्यकता है। संसार शरीर और भोग से दूर होना, निवृत्ति होने का नाम संवेग भाव है। परिभ्रमण का काल कम करने का पुरुषार्थ करो ताकि सुख का धाम मुक्ति की प्राप्ति हो।इस अवसर पर सभी समाजजन उपस्थित थे।

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