Skip to content
Zelo Electric Scooter
malwafirst.in
Menu
  • होम
  • अंतरराष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • मध्यप्रदेश
    • नीमच
    • मंदसौर
    • रतलाम
    • भोपाल
    • इंदौर
    • जबलपुर
    • ग्वालियर
  • राजस्थान
    • जयपुर
    • चित्तौड़गढ़
    • भीलवाड़ा
    • प्रतापगढ़
    • उदयपुर
    • कोटा
  • विविध
    • खेल
    • जीवन शैली
    • टेक
    • धर्म
    • बिज़नस
    • मनोरंजन
    • स्वास्थ्य
  • मंडी भाव
  • ई-पेपर
  • Video
Menu

एक दशक में 16 राज्यों में हुए चुनाव, चुनावी हिंसा में पश्चिम बंगाल नंबर-1

Posted on April 6, 2026

खास बातें बंगाल में डेढ़ दशक का ‘खूनी’ हिसाब पंचायत से विधानसभा चुनाव तक 1999 से 2016 तक हर साल औसतन 20 हत्याएं : NCRB West Bengal Election Violence Statistics: तुलनात्मक आंकड़े 2026 के रण में भी नहीं थम रही हिंसा SIR के मुद्दे से गरमायी राजनीति सभ्यता और लोकतंत्र पर खतरा! West Bengal Election Violence Statistics: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के शोर के बीच एक ऐसी रिपोर्ट सामने आयी है, जिसने राज्य की कानून-व्यवस्था और चुनावी निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिये हैं.

पिछले एक दशक (2016-2026) में देश के 16 राज्यों में चुनाव हुए हैं. इन चुनावों की तुलना में पश्चिम बंगाल चुनावी हिंसा के मामले में टॉप पर रहा है. बंगाल में चुनाव का मतलब सिर्फ ‘वोट’ नहीं, राजनीतिक संघर्ष और खून-खराबा बन गया है. बंगाल में डेढ़ दशक का ‘खूनी’ हिसाब एनसीआरबी के आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2010 से 2019 तक 161 राजनीतिक हत्याएं हुईं.

यह किसी भी राज्य से ज्यादा हैं. वर्ष 2010 और 2011 में सबसे ज्यादा 38-38 लोगों की मौत हुई. वर्ष 2012 में 22, वर्ष 2013 में 26 और वर्ष 2014 में 10 राजनीतिक हत्याएं हुईं. वर्ष 2015 से 2017 तक हर साल सिर्फ 1-1 पॉलिटिकल मर्डर दर्ज हुए. इसके बाद वर्ष 2018 और 2019 में 12-12 मौतें हुईं.

प्रमुख राजनीतिक हिंसा की घटनाओं का विवरण आप यहां देख सकते हैं. 21 जुलाई 1993 को कोलकाता में प्रदर्शन कर रहे युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं पर फायरिंग हुई और इसमें 13 लोगों की मौत हो गयी. उस समय ज्योति बसु के नेतत्व वाली वाम मोर्चा सत्ता में थी. 1979 में सुंदरबन के मारिचझापी द्वीप पर बसे हिंदू दलित बंगाली शरणार्थियों को वन भूमि (जंगल की जमीन) से बेदखल करने के लिए फायरिंग हुई, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों की मौत हो गयी.

इसे राज्य प्रायोजित हिंसा करार दिया गया और कहा गया कि ऐसी घटनाएं बंगाल में आम हो गयीं हैं. रिपोर्ट्स बताते हैं कि वामफ्रंट की सरकार में वर्ष 2007-08 में सिंगूर और नंदीग्राम में करीब 50 लोगों की मौत हुई, जिसने बंगाल में सत्ता परिवर्तन कर दिया. 2011 में ममता बनर्जी की सरकार बनी और तृणमूल कांग्रेस ने नारा दिया- बदला नॉय बदल चाई यानी बदला नहीं बदलाव चाहिए.

परिवर्तन चाहिए. इसके विपरीत बदले की राजनीति हुई और हिंसक घटनाओं में वाम मोर्चा के कार्यकर्ताओं की मौतें हुईं. ‘वॉयलेंस इन बंगाल’ के लेखक तन्मय चटर्जी लिखते हैं कि नारा भले कुछ भी रहा हो, हिंसा का दौर नहीं थमा. वर्ष 2011 में सीपीएम और उसके सहयोगी दलों के करीब 50 कार्यकर्ताओं की हत्या हुई.

इनकी हत्या का आरोप सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस पर लगा. वर्ष 2018 के पंचायत चुनावों में बड़े पैमाने पर हिंसा हुई. 34 प्रतिशत सीट पर टीएमसी उम्मीदवार के खिलाफ किसी को चुनाव लड़ने नहीं दिया गया. इन सीटों पर टीएमसी के प्रत्याशी निर्विरोध जीत गये. 2019 के लोकसभा चुनाव में बड़े पैमाने पर बंगाल में हिंसा के मामले सामने आये.

हालांकि, इस दौरान कितनी मौतें हुईं, उसका स्पष्ट आंकड़ा उपलब्ध नहीं है. 2021 के बंगाल चुनाव में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दावा किया कि टीएमसी वालों ने भाजपा के 130 कार्यकर्ताओं को मौत के घाट उतार दिया. अलजजीरा और रॉयटर्स की रिपोर्ट बताती है कि 2023 के पंचायत चुनावों में बंगाल में कम से कम 11 लोगों की मौत हुई और दर्जनों लोग घायल हुए.

2021 के बंगाल विधानसभा चुनाव में सीतलकुची के जोरपाटकी गांव में मतदान केंद्र के बाहर सुरक्षा में तैनात सीआईएसएफ के जवानों को आत्म रक्षा के लिए फायरिंग करनी पड़ी, जिसमें 4 युवाओं की मौत हो गयी. जवानों ने कहा कि बूथ लूटने की कोशिश हो रही थी. लोगों ने उन पर हमला कर दिया.

अपनी जान बचाने के लिए उन्हें फायरिंग करनी पड़ी. मार्च 2025 में टीएमसी के समर्थकों ने कूचबिहार दक्षिण के भाजपा एमएलए निखिल रंजन दे पर हमला कर दया, जब वह दीनहाटा के कोर्ट परिसर से बाहर निकल रहे थे. बंगाल की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें पंचायत से विधानसभा चुनाव तक वर्ष 2018 के पंचायत चुनाव हों या वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव, बंगाल में हिंसा का एक ‘पैटर्न’ नजर आता है.

2021 के बंगाल चुनावों के बाद हुई हिंसा (Post-Poll Violence) ने तो राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरी थी. इसे भी पढ़ें : बंगाल पंचायत चुनाव में हिंसा, बूथ पर कब्जा, तोड़फोड़, आगजनी, लाइव VIDEO यहां देखें 1999 से 2016 तक हर साल औसतन 20 हत्याएं : NCRB एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक, बंगाल में 1999 से 2016 के बीच औसतन हर साल 20 राजनीतिक हत्याएं हुईं.

हाल के वर्षों में तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच टकराव के मामले बढ़े हैं. 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद बंगाल में कम से कम 47 पॉलिटिकल मर्डर हुए. इसमें तृणमूल और भाजपा दोनों के कार्यकर्ता शामिल थे. हालांकि, 2021 के बंगाल चुनाव में 130 भाजपा कार्यकर्ताओं के मारे जाने का दावा अमित शाह और भाजपा के नेता करते रहे हैं.

इस चुनाव में भाजपा के बड़े नेताओं पर हमले के भी मामले सामने आये. इसे भी पढ़ें : दक्षिण 24 परगना में TMC नेता की ‘स्टीमरोलर’ वाली धमकी, BJP बोली- डरा रही ममता की पार्टी West Bengal Election Violence Statistics: तुलनात्मक आंकड़े केरल, तमिलनाडु, असम और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में हुए चुनावी हिंसा के आंकड़े भी बंगाल से कम हैं.

बंगाल में प्रति चुनाव होने वाली हिंसक घटनाओं और मौतों की संख्या सबसे अधिक है. इसे भी पढ़ें : बंगाल चुनाव 2026 से पहले राजनीतिक हिंसा, कांग्रेस कार्यकर्ता और भाजपा प्रत्याशी पर हमला 2026 के रण में भी नहीं थम रही हिंसा वर्तमान विधानसभा चुनाव के दौरान भी हिंसा का साया बरकरार है.

हाल ही में कोलकाता में मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय के बाहर टीएमसी और बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच हुई झड़प इसका ताजा उदाहरण है. इसे भी पढ़ें : बंगाल में ममता का ‘चौका’ या भाजपा का ‘परिवर्तन’? 294 सीटों का पूरा गणित और 2 चरणों का चुनावी शेड्यूल, यहां जानें सब कुछ SIR के मुद्दे से गरमायी राजनीति वोटर लिस्ट (SIR) में गड़बड़ी और ‘बाहरी’ वोटरों को मतदाता सूची में शामिल करने के आरोपों ने माहौल को और गरमा दिया है.

मालदा के मोथाबाड़ी में न्यायिक अधिकारियों (जजों) के घेराव और उसके बाद एनआईए (NIA) की कार्रवाई ने भी राज्य में गिरती कानून-व्यवस्था की पोल खोल दी है. इसे भी पढ़ें : मालदा में आधी रात को हाई-वोल्टेज ड्रामा, 3 महिला जजों समेत 7 लीगल अफसर को भीड़ ने घेरा, लाठीचार्ज के बाद हुआ रेस्क्यू सभ्यता और लोकतंत्र पर खतरा! राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि बंगाल में हिंसा केवल सत्ता परिवर्तन के लिए नहीं, बल्कि वैचारिक और अस्तित्व की लड़ाई बन गयी है.

भाजपा इसे ‘लोकतंत्र की हत्या’ बता रही है, तो सत्ताधारी टीएमसी इसे ‘बाहरी ताकतों की साजिश’ करार दे रही है. इन सबके बीच बंगाल का आम नागरिक पिस रहा है. इसे भी पढ़ें किसानों के लिए ‘फांसी का फंदा’ बन गया बंगाल का ‘सोना’, 15 साल में 136 मौत पर भाजपा ने ममता बनर्जी सरकार को घेरा मालदा कांड में ‘विलेन’ कौन? TMC ने 3 फोटो जारी कर किया बड़ा धमाका VIDEO: बंगाल पंचायत चुनाव में हिंसा, आगजनी, बमबाजी और चले तीर धनुष चुनावी शोर के बीच ‘काले खजाने’ का खेल! बंगाल में 274 करोड़ का माल जब्त, शराब, ड्रग्स और फ्री गिफ्ट्स की बाढ़ मालदा में बोलीं ममता बनर्जी – चैन से जीना है, तो भाजपा का विरोध करो, TMC को वोट नहीं दिया तो रिश्ता खत्म.

शेयर करें: WhatsApp Facebook

इस खबर को शेयर करें:

WhatsAppFacebook

यूट्यूब लाइव न्यूज़

▶️
Malwa First YouTube

क्षेत्र की तमाम वीडियो खबरें और लाइव अपडेट्स सबसे पहले देखें।

Subscribe Channel

फेसबुक अपडेट्स

Follow on Facebook

Recent Posts

  • छात्रावास की सुविधा से हरीश की पढ़ाई को मिली नई उड़ान
  • नवम राष्ट्रीय पोषण माह के तहत जिले में पोषण एवं नशा मुक्ति जागरूकता के विभिन्न कार्यक्रम किए गए आयोजित
  • चलित खाद्य प्रयोगशाला ने विद्यार्थियों को मिलावट की पहचान और स्वस्थ खान-पान के प्रति किया जागरूक
  • अवैध मदिरा के विरुद्ध आबकारी विभाग की बड़ी कार्रवाई
  • सेवा संकल्प अभियान के तहत 17 सितंबर को 50 हजार दीपों से जगमगाएगा किलेश्वर महादेव मंदिर परिसर

Recent Comments

  1. A WordPress Commenter on Hello world!
©2026 malwafirst.in | Design: Newspaperly WordPress Theme