सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत टाउन हॉल, दशहरा मैदान नीमच में आयोजित समन्वित कृषि विकास कार्यशाला में किसानों को खेती को अधिक लाभकारी बनाने के लिए फसल लागत एवं आर्थिक विश्लेषण, फसलों के लिए अनुशंसित पोषक तत्व एवं उर्वरकों की मात्रा तथा कृषि-पशुपालन की लागत एवं आय के तुलनात्मक चार्ट की जानकारी दी गई। कार्यशाला में विधायक नीमच श्री दिलीप सिंह परिहार,विधायक जावद श्री ओमप्रकाश सखलेचा, कलेक्टर श्री हिमांशु चंद्रा,सीईओ जिला पंचायत श्री अमन वैष्णव सहित जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों की उपस्थिति में इन चार्ट का विमोचन किया गया। कार्यशाला में प्रस्तुत प्रति हेक्टेयर फसल उत्पादन लागत एवं आर्थिक विश्लेषण चार्ट में खरीफ एवं रबी की विभिन्न फसलों की जुताई एवं खेत तैयारी, बीज, उर्वरक एवं पोषक तत्व, सिंचाई, पौध संरक्षण, कटाई/थ्रेशिंग तथा अन्य खर्चों को शामिल करते हुए कुल लागत, औसत उत्पादन, प्रचलित बिक्री मूल्य, कुल आय और कुल लाभ का तुलनात्मक विवरण दिया गया है। इसका उद्देश्य किसानों को केवल उत्पादन बढ़ाने के बजाय लागत, संभावित आय और लाभ को ध्यान में रखकर फसल चयन के लिए तथ्यपरक आधार उपलब्ध कराना है। चार्ट के अनुसार उदाहरण के तौर पर खरीफ में सोयाबीन की प्रति हेक्टेयर लागत 55,125 रुपये, औसत उत्पादन 15 क्विंटल तथा कुल आय 85,620 रुपये दर्शाई गई है। वहीं मूंगफली की लागत 55,100 रुपये और कुल आय 1,50,340 रुपये तथा उड़द की लागत 31,484 रुपये और कुल आय 82,000 रुपये दर्शाई गई है। रबी फसलों में गेहूं की लागत 58,105 रुपये और कुल आय 1,03,400 रुपये, जबकि सरसों की लागत 36,950 रुपये और कुल आय 93,000 रुपये दर्शाई गई है। चार्ट में उच्च मूल्य एवं विविधीकरण वाली फसलों की संभावनाओं को भी रेखांकित किया गया है। चिया की प्रति हेक्टेयर कुल आय 2,16,000 रुपये और लाभ 1,78,064 रुपये, किनोवा की आय 1,57,500 रुपये और लाभ 1,17,635 रुपये, जबकि अश्वगंधा की आय 2,34,000 रुपये और लाभ 1,46,401 रुपये दर्शाया गया है। इसी प्रकार लहसुन की प्रति हेक्टेयर लागत 2,56,705 रुपये, कुल आय 12 लाख रुपये तथा लाभ 9,43,295 रुपये दर्शाया गया है। संतुलित पोषण और उर्वरक उपयोग पर जोर कार्यशाला में जारी फसलवार अनुशंसित पोषक तत्व एवं उर्वरक मात्रा के चार्ट में खरीफ, रबी तथा उद्यानिकी फसलों के लिए नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश की अनुशंसित मात्रा के साथ अलग-अलग उर्वरक विकल्पों की जानकारी दी गई। किसानों को मृदा परीक्षण एवं फसल की आवश्यकता के अनुसार संतुलित उर्वरक उपयोग के लिए प्रेरित किया गया। चार्ट में गोबर की खाद/कम्पोस्ट के प्रति हेक्टेयर उपयोग तथा सोयाबीन एवं तिलहनी-दलहनी फसलों में सल्फर के उपयोग संबंधी सुझाव भी दिए गए हैं। कृषि के साथ पशुपालन से आय के अतिरिक्त अवसर कार्यशाला में प्रस्तुत पशुपालन एवं कृषि लागत-आर्थिक विश्लेषण में 10 पशुओं की इकाई के आधार पर पशु पोषण, सूखा चारा, एक हेक्टेयर भूमि से प्राप्त चारे, पशु दाना/खली, मजदूरी, बिजली-पानी तथा उपचार एवं अन्य खर्चों का विवरण दिया गया। चार्ट के अनुसार इन मदों पर कुल वार्षिक लागत 5,61,100 रुपये दर्शाई गई है, जबकि दूध, गोबर तथा अन्य आय को मिलाकर कुल वार्षिक आय 11,26,350 रुपये और शुद्ध वार्षिक लाभ 5,64,250 रुपये दर्शाया गया है। कार्यशाला में किसानों को खेती को केवल एक फसल तक सीमित न रखते हुए फसल विविधीकरण, संतुलित पोषण, आधुनिक कृषि तकनीक, मूल्य संवर्धन तथा कृषि के साथ पशुपालन को आय के पूरक माध्यम के रूप में अपनाने पर जोर दिया गया। प्रस्तुत तुलनात्मक चार्ट किसानों को उपलब्ध संसाधनों, लागत और संभावित आय का आकलन कर अधिक लाभकारी एवं टिकाऊ कृषि प्रणाली विकसित करने में मार्गदर्शन देने का माध्यम है। कार्यशाला में कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन सहित संबंधित विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि, विशेषज्ञ एवं किसान उपस्थित रहे।
स्रोत: जनसंपर्क कार्यालय, नीमच (MPINFO)


