12 प्रतिष्ठानों पर शटडाउन की कार्रवाई,न्यायालय ने लगाया 14.8 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना कलेक्टर श्री हिमांशु चंद्रा के निर्देशन में नीमच जिले में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और आमजन को सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के लिए खाद्य एवं औषधि प्रशासन द्वारा लगातार कार्रवाई की जा रही है। जनवरी से सितंबर 2026 तक खाद्य सुरक्षा टीम ने निर्धारित लक्ष्य से अधिक निरीक्षण और नमूना संग्रहण कर खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच की। इस दौरान अनियमितताएं पाए जाने पर संबंधित प्रतिष्ठानों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की गई। इन प्रयासों का उद्देश्य खाद्य पदार्थों में मिलावट, अस्वच्छ परिस्थितियों में खाद्य निर्माण और नियमों के उल्लंघन पर प्रभावी रोक लगाकर उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की रक्षा करना है। निर्धारित लक्ष्य से अधिक निरीक्षण और नमूना संग्रहण नियंत्रक, खाद्य एवं औषधि प्रशासन, मध्यप्रदेश तथा जिला प्रशासन के निर्देशन और अभिहित अधिकारी एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. दिनेश प्रसाद के मार्गदर्शन में खाद्य सुरक्षा टीम ने जनवरी से सितंबर 2026 तक निर्धारित 180 के लक्ष्य के विरुद्ध 299 खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। इसी अवधि में 180 के लक्ष्य के मुकाबले 263 विधिक नमूने तथा 270 के लक्ष्य के विरुद्ध 475 निगरानी नमूने लिए गए। खाद्य सुरक्षा टीम की यह कार्रवाई बाजार में उपलब्ध खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच और नियमों के पालन की निगरानी को मजबूत करती है। 12 प्रतिष्ठानों पर शटडाउन की कार्रवाई जिला प्रशासन की टीम के साथ की गई कार्रवाई में 12 खाद्य प्रतिष्ठानों में गंभीर अनियमितताएं पाए जाने पर उनके खाद्य लाइसेंस अथवा पंजीयन निलंबित कर प्रतिष्ठान बंद कराए गए। इनमें अस्वच्छ परिस्थितियों में खाद्य पदार्थों का निर्माण, एक्सपायरी तिथि के बाद खाद्य सामग्री का निर्माण, भंडारण या विक्रय तथा बिना खाद्य पंजीयन के खाद्य कारोबार जैसी अनियमितताएं शामिल थीं। इसके अतिरिक्त, निरीक्षण के दौरान नियमों के उल्लंघन और कमियां पाए जाने पर 89 खाद्य प्रतिष्ठानों को खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धारा 32 के अंतर्गत सुधार सूचना पत्र जारी किए गए। जांच में 31 नमूने फेल, घी का एक नमूना असुरक्षित खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के अंतर्गत जांच के लिए भेजे गए नमूनों में से राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला, भोपाल से प्राप्त 88 जांच रिपोर्टों में 31 नमूने निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे। इनमें एक नमूना असुरक्षित, 13 नमूने अवमानक, तीन नमूने अवमानक एवं मिथ्याछाप, तीन नमूने मिथ्याछाप तथा दो नमूने अपद्रव्य पाए गए। इसके अलावा, खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा जारी लेबल संबंधी गैर-अनुपालना रिपोर्ट के आधार पर नौ नमूने मिथ्याछाप पाए गए। जांच में अवमानक एवं मिथ्याछाप पाए गए खाद्य पदार्थों में घी, मिश्रित दूध, दही, पनीर, मैथीदाना, धनिया, कलौंजी, मिठाइयां और टोंड मिल्क शामिल हैं। घी का एक नमूना असुरक्षित पाया गया। इन जांचों के माध्यम से खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता संबंधी कमियों की पहचान कर संबंधित कारोबारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। न्यायालय में 26 नए प्रकरण, 14.8 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना खाद्य पदार्थों के असुरक्षित, अवमानक, मिथ्याछाप अथवा अपद्रव्य पाए जाने से संबंधित मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। संबंधित प्रकरणों में आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया पूरी कर मामले न्यायालय में प्रस्तुत किए जा रहे हैं। वर्ष 2026 में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के अंतर्गत न्यायालय में 26 प्रकरण दर्ज किए गए। वहीं, पूर्व में दर्ज प्रकरणों में से 29 मामलों में न्यायालय द्वारा आरोपियों पर 14.8 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया गया। इनमें से 8.7 लाख रुपये शासन के निर्धारित मद में जमा कराए जा चुके हैं। लाइसेंस और पंजीयन शुल्क से 26 लाख रुपये से अधिक राजस्व जनवरी से सितंबर 2026 तक खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के अंतर्गत जारी लाइसेंस एवं पंजीयन से प्राप्त 26 लाख रुपये से अधिक की राशि शासन के निर्धारित मद में जमा कराई गई। इससे खाद्य कारोबार के पंजीयन और नियामकीय व्यवस्था के क्रियान्वयन में प्रशासन की सक्रियता भी सामने आती है। आमजन के स्वास्थ्य की सुरक्षा पर जोर खाद्य सुरक्षा से जुड़ी ऐसी कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य केवल नियमों का उल्लंघन करने वालों पर दंडात्मक कार्रवाई करना नहीं, बल्कि बाजार में सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थों की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी है। नियमित निरीक्षण, नमूनों की जांच और दोषी कारोबारियों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई से खाद्य पदार्थों में मिलावट पर अंकुश लगाने, स्वच्छता मानकों का पालन बढ़ाने तथा उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की रक्षा करने में मदद मिलती है। खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के अंतर्गत असुरक्षित खाद्य पदार्थों के निर्माण, भंडारण और विक्रय पर निर्धारित प्रावधानों के अनुसार कारावास एवं जुर्माने की कार्रवाई हो सकती है। अवमानक और मिथ्याछाप खाद्य पदार्थों के मामलों में भी कानून के अनुसार आर्थिक दंड का प्रावधान है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि खाद्य सुरक्षा संबंधी जांच और कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। किसी भी खाद्य प्रतिष्ठान में नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
स्रोत: जनसंपर्क कार्यालय, नीमच (MPINFO)

