पिपलिया हाड़ी में आयुष्मान आरोग्य मंदिर द्वारा निशुल्क आयुर्वेद चिकित्सा शिविर आयोजित, Empowering Rural Health Through Ayurveda -1

पिपलिया हाड़ी में आयुष्मान आरोग्य मंदिर द्वारा निशुल्क आयुर्वेद चिकित्सा शिविर आयोजित
पिपलिया हाड़ी में आयुष्मान आरोग्य मंदिर द्वारा आयोजित निशुल्क आयुर्वेद चिकित्सा शिविर में 54 लाभार्थियों को मुफ्त जांच और दवाइयां वितरित की गईं। डॉ. आबिद खान ने मौसमी बीमारियों से बचाव, नशा मुक्ति और स्वस्थ जीवनशैली पर महत्वपूर्ण जानकारी दी।
ग्राम पंचायत पिपलिया हाड़ी में बुधवार को आयुष्मान आरोग्य मंदिर मालाहेड़ा द्वारा एक भव्य निशुल्क आयुर्वेद चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण अंचल के लोगों को पारंपरिक आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति के माध्यम से स्वास्थ्य लाभ प्रदान करना तथा उन्हें रोगों से बचाव के प्रति जागरूक करना था। शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लेकर नि:शुल्क जांच एवं औषधियों का लाभ उठाया।

54 लाभार्थियों को मिला स्वास्थ्य लाभ
शिविर में कुल 54 लाभार्थियों की जांच की गई और उन्हें नि:शुल्क आयुर्वेदिक औषधियां वितरित की गईं। इस दौरान आमवात, संधिवात, चर्म रोग, उदर रोग, विबंध, श्वास, कास, प्रतिश्याय, रक्त अल्पता, अर्श, गैस, अम्लपित्त जैसी आम और दीर्घकालिक बीमारियों से पीड़ित मरीजों का परीक्षण किया गया। ग्रामीणों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे शिविरों से उन्हें न केवल आर्थिक राहत मिलती है बल्कि बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं भी अपने गांव में ही उपलब्ध हो जाती हैं।
डॉ. आबिद खान ने दी जीवनशैली संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी
आयुष चिकित्सक डॉ. आबिद खान ने शिविर के दौरान मरीजों को मौसमी बीमारियों से बचने के उपाय, तनाव से मुक्ति, नशा मुक्ति, स्वच्छता अभियान, दिनचर्या और पोषण से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। उन्होंने कहा कि बदलते मौसम में खानपान और दिनचर्या का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है ताकि सर्दी-खांसी, बुखार, गैस, जोड़ों के दर्द जैसी समस्याओं से बचा जा सके।
डॉ. खान ने बताया कि आयुर्वेद न केवल रोगों के उपचार में सहायक है बल्कि यह संपूर्ण जीवनशैली को संतुलित करने का विज्ञान भी है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे नियमित रूप से योग, प्राणायाम और संतुलित आहार को अपनी दिनचर्या में शामिल करें।
नशा मुक्ति और स्वच्छता पर दिया गया विशेष संदेश
शिविर में नशा मुक्ति अभियान पर भी विशेष रूप से जोर दिया गया। डॉ. आबिद खान ने कहा कि तंबाकू, गुटखा, शराब जैसे नशे स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं और अनेक बीमारियों का कारण बनते हैं। उन्होंने ग्रामीणों से आग्रह किया कि वे स्वयं नशे से दूर रहें और अपने परिवार तथा समाज को भी इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करें।
साथ ही स्वच्छता अभियान के तहत लोगों को अपने आसपास साफ-सफाई रखने, स्वच्छ पानी का उपयोग करने और हाथ धोने जैसी आदतों को अपनाने की सलाह दी गई। उन्होंने कहा कि स्वच्छता ही स्वस्थ जीवन की पहली सीढ़ी है।
आयुष्मान आरोग्य मंदिर की सराहनीय पहल
आयुष्मान आरोग्य मंदिर मालाहेड़ा द्वारा आयोजित यह शिविर सरकार की उस मंशा को साकार करता है, जिसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित की जा रही है। इस पहल से ग्रामीणों को न केवल मुफ्त इलाज मिला बल्कि उन्हें आयुर्वेद चिकित्सा के महत्व को भी समझने का अवसर मिला।
स्थानीय लोगों ने बताया कि पहले उन्हें छोटी-छोटी बीमारियों के लिए भी शहर जाना पड़ता था, जिससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी होती थी। लेकिन इस प्रकार के शिविरों से अब उन्हें अपने गांव में ही बेहतर चिकित्सा सुविधा मिल रही है।

औषधालय स्टाफ और कार्यकर्ताओं का रहा सहयोग
इस शिविर को सफल बनाने में औषधालय स्टाफ, आशा कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी सहायिका और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। सभी ने मिलकर मरीजों के पंजीयन, जांच और औषधि वितरण की प्रक्रिया को सुचारू रूप से संपन्न कराया।
कार्यक्रम में मौजूद आशा कार्यकर्ताओं ने ग्रामीण महिलाओं को स्वास्थ्य और पोषण से संबंधित जानकारी दी तथा उन्हें गर्भावस्था और शिशु देखभाल से जुड़े जरूरी सुझाव भी दिए।
ग्रामीणों में दिखा उत्साह
शिविर के दौरान ग्रामीणों में खासा उत्साह देखने को मिला। सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग शिविर स्थल पर पहुंचने लगे थे। कई बुजुर्गों और महिलाओं ने बताया कि उन्हें लंबे समय से जोड़ों के दर्द और गैस की समस्या थी, लेकिन अब उन्हें आयुर्वेदिक दवाओं से राहत मिलने की उम्मीद है।
ग्रामीणों ने प्रशासन और आयुष्मान आरोग्य मंदिर का आभार व्यक्त करते हुए मांग की कि ऐसे शिविरों का आयोजन नियमित रूप से किया जाए ताकि अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें।
भविष्य में और शिविरों की योजना
आयुष विभाग के अधिकारियों ने संकेत दिए कि आने वाले समय में अन्य ग्राम पंचायतों में भी इसी तरह के निशुल्क आयुर्वेद चिकित्सा शिविर आयोजित किए जाएंगे। उनका उद्देश्य है कि हर नागरिक को सुलभ, सस्ती और प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
उन्होंने कहा कि आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति प्राकृतिक और सुरक्षित है, जिससे दुष्प्रभाव की संभावना कम होती है। इसी कारण सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में आयुष सेवाओं को बढ़ावा दे रही है।

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