नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की ओर से आनलाइन बाल यौन शोषण और दुरुपयोग सामग्री (सीएसईएएम) के प्रसार को रोकने के लिए उठाए गए कदमों पर जवाब दाखिल न करने चिंता जताई है।
अदालत ने सरकार को इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दाखिल करने का अंतिम अवसर प्रदान किया है।
न्यायमूर्ति जेबी पार्डीवाला और के. विनोद चंद्रन की पीठ ने इलेक्ट्रानिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और कानून और न्याय मंत्रालय को रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।
पीठ ने इन मंत्रालयों से कहा कि वे सितंबर 2024 के अपने निर्णय को लागू करने के लिए उठाए गए कदमों का विवरण दें और इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्मों पर सीएसईएएम के प्रसार को रोकने के उपायों की जानकारी दें।
सुप्रीम कोर्ट जस्ट राइट्स फार चिल्ड्रन अलायंस (जेआरसीए) की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा है। याचिका में इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्मों को सीएसईएएम की रिपोर्ट कानून प्रवर्तन अधिकारियों को करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देशों को सख्ती से लागू करने की मांग की गई है।
पीठ ने कहा कि 14 अगस्त को दिए गए निर्देशों के बावजूद मंत्रालयों ने अपने जवाब दाखिल नहीं किए हैं।
इस पर केंद्र की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सालिसिटर जनरल (एएसजी) केएम नटराज ने बताया कि सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है और पहले ही एक कंपनी के खिलाफ नोटिस जारी कर चुकी है।
इस मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी। जेआरसीए ने सीएसईएएम की पहचान, रिपोर्टिंग और संरक्षण के लिए एक समान मानक संचालन प्रक्रिया की मांग की है।


