कैद की दीवारें भी नहीं रोक सकी भाई-बहन का प्यार, जिला जेल में राखी से महका हर आंगन,बहनों ने कैदी भाइयो को बांधी रखी,झलके आंसू

कैद की दीवारें भी नहीं रोक सकी भाई-बहन का प्यार, जिला जेल में राखी से महका हर आंगन,बहनों ने कैदी भाइयो को बांधी रखी,झलके आंसू
नीमच। रिश्तों की डोर जब सच्चे प्रेम से बंधी हो, तो न कोई दीवार उसे रोक सकती है और न कोई दूरी कम कर सकती है। भाई-बहन के इसी अटूट बंधन का सजीव उदाहरण शनिवार को नीमच के ग्राम कनावटी स्थित जिला जेल में देखने को मिला, जहां रक्षाबंधन का पर्व पूरे हर्षोल्लास और भावुक पलों के साथ मनाया गया।सुबह से ही दूर-दराज गांवों और शहरों से बहनें अपने कैदी भाइयों से मिलने के लिए जेल पहुंची थीं। सुरक्षा जांच और औपचारिकताओं के बाद जब बहनें अपने भाइयों से मिलीं, तो कलाई पर राखी बांधते ही आंखें नम हो गईं। किसी ने भाई के सिर पर हाथ फेरते हुए बलाई ली, तो किसी ने मिठाई खिलाकर मुंह मीठा कराया। जेल परिसर में इस दौरान भावनाओं और अपनत्व का अद्भुत संगम देखने को मिला।
जिला जेल अधीक्षक एन.एस. राणा ने बताया कि मध्यप्रदेश शासन और जेल मुख्यालय के निर्देशानुसार हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी रक्षाबंधन पर बहनों को प्रत्यक्ष रूप से अपने भाइयों को राखी बांधने का अवसर प्रदान किया गया। जेल कैंटीन से ही मिठाई, नारियल, चावल, कुमकुम, रोली और पूजा की थाली की पूरी व्यवस्था की गई, ताकि बाहर से कोई सामग्री लाने की जरूरत न पड़े। सुरक्षा की दृष्टि से चार महिला और चार पुरुष गार्ड तैनात किए गए थे।नीमच जिला जेल में इस समय 10 महिला और 482 पुरुष कैदी हैं, जिनमें मालवा-मेवाड़ के अलावा पंजाब और हरियाणा के कैदी भी शामिल हैं। बहनों को सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक अपने भाइयों से मिलने का समय दिया गया था, लेकिन प्रशासन ने स्पष्ट किया कि अगर कोई बहन दूर से देर से पहुंचती है, तो उसे भी राखी बांधने का अवसर मिलेगा।जेल प्रशासन ने कैदियों की सहायता से कैंटीन में मिठाई, नारियल और पूजा सामग्री की दुकानें लगवाई थीं, ताकि बहनों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
पूरे परिसर में चहल-पहल और खुशियों का माहौल था, लेकिन इसके बीच कई आंखें नम भी थीं।भाई-बहन के बीच यह मिलन क्षणिक भले ही था, मगर इसमें प्रेम, स्नेह और अपनत्व की गहराई इतनी थी कि हर किसी का दिल पिघल गया।रक्षाबंधन का यह आयोजन एक बार फिर साबित कर गया कि स्नेह और रिश्तों की ताकत सबसे ऊंची होती है। जेल की ऊंची दीवारें और सख्त ताले भी भाई-बहन के प्रेम को कैद नहीं कर सकते। इस दिन कैदी भाइयों की कलाई पर बंधा रक्षा सूत्र न सिर्फ उनके लिए सुरक्षा और आशीर्वाद का प्रतीक था, बल्कि यह विश्वास भी दिला रहा था कि बाहर कोई उनका इंतजार कर रहा है,जो हमेशा उनके साथ है।