PMFME योजना: नीमच की हर पंचायत में सूक्ष्म उद्योग, मत्स्य FCO गठन और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के निर्देश | Neemuch News, 1

PMFME योजना: नीमच की हर पंचायत में सूक्ष्म उद्योग, मत्स्य FCO गठन और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के निर्देश | Neemuch News
PMFME योजना के तहत नीमच जिले की प्रत्येक पंचायत में एक सूक्ष्म उद्योग स्थापित करने के निर्देश कलेक्टर हिमांशु चंद्रा ने दिए। मत्स्य पालन को बढ़ावा देने हेतु एफसीओ गठन, डिफाल्टर किसानों को मुख्यधारा में लाने, फूलों की खेती, मंडी में नए कियोस्क और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने को लेकर समीक्षा बैठक आयोजित।
PMFME योजना के तहत नीमच की हर पंचायत में सूक्ष्म उद्योग स्थापित करने के निर्देश, मत्स्य पालन और दुग्ध उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा
नीमच। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और किसानों को स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन (PMFME) योजना के अंतर्गत जिले की प्रत्येक पंचायत में न्यूनतम एक सूक्ष्म उद्योग स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं। यह निर्देश कलेक्टर हिमांशु चंद्रा ने गुरुवार को कलेक्टोरेट सभाकक्ष नीमच में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान दिए।
बैठक में एपीसी समूह, कृषि, उद्यानिकी, मत्स्य पालन, पशुपालन और सहकारिता विभाग द्वारा संचालित योजनाओं एवं कार्यक्रमों की विभागवार समीक्षा की गई। इस अवसर पर जिला पंचायत सीईओ अमन वैष्णव सहित विभिन्न विभागों के जिला अधिकारी उपस्थित रहे।

PMFME योजना से ग्रामीणों को मिलेगा स्वरोजगार
कलेक्टर श्री चंद्रा ने कहा कि पीएमएफएमई योजना केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण युवाओं, किसानों और महिला समूहों को आत्मनिर्भर बनाने का सशक्त माध्यम है। प्रत्येक पंचायत में यदि एक-एक सूक्ष्म खाद्य उद्योग स्थापित होता है, तो इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और पलायन रुकेगा।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पंचायत स्तर पर जागरूकता शिविर, प्रशिक्षण कार्यक्रम और बैंक लिंकेज के माध्यम से ग्रामीणों को योजना से जोड़ा जाए।
मत्स्य पालन को बढ़ावा, इस माह बनेगा FCO
बैठक में कलेक्टर ने मत्स्य विभाग को निर्देश दिए कि जिले में मत्स्य पालन को व्यवसायिक रूप देने के लिए इस माह मत्स्य पालकों का एक एफसीओ (Farmer Collective Organization) गठित किया जाए।
एफसीओ के माध्यम से मत्स्य पालकों को—
तकनीकी प्रशिक्षण
सरकारी अनुदान
बाजार से सीधा जुड़ाव
आय में स्थायित्व
जैसे लाभ मिल सकेंगे। कलेक्टर ने कहा कि मत्स्य पालन ग्रामीण क्षेत्रों में कम लागत और अधिक लाभ वाला व्यवसाय है, जिसे प्रोत्साहित किया जाना आवश्यक है।
डिफाल्टर किसानों को मुख्यधारा में लाने विशेष अभियान
सहकारिता विभाग और जिला केंद्रीय सहकारी बैंक की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने डिफाल्टर किसानों को प्रेरित कर बकाया राशि जमा कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि डिफाल्टर स्थिति में रहने से किसान—
केसीसी
कृषि ऋण
खाद-बीज
पशुपालन एवं अन्य सरकारी योजनाओं
के लाभ से वंचित रह जाते हैं।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विशेष अभियान चलाकर किसानों को डिफाल्टर श्रेणी से बाहर लाया जाए और उन्हें पुनः सहकारिता की मुख्यधारा से जोड़ा जाए।

धार्मिक स्थलों के आसपास फूलों की खेती को प्रोत्साहन
उद्यानिकी विभाग की समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने फूलों की खेती को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रमुख धार्मिक स्थलों के आसपास क्लस्टर विकसित कर फूलों की खेती के लिए किसानों को प्रेरित किया जाए।
इस वर्ष आंत्री माता और भादवा माता क्षेत्र में 70 हेक्टेयर क्षेत्र में फूलों की खेती का लक्ष्य रखा गया है। इससे—
किसानों की आय में वृद्धि
स्थानीय रोजगार
पूजा-पाठ एवं धार्मिक आयोजनों के लिए स्थानीय आपूर्ति
सुनिश्चित होगी।
नीमच मंडी में किसानों की सुविधा के लिए नए कियोस्क
कलेक्टर ने नीमच मंडी प्रांगण में किसानों की सुविधा बढ़ाने के लिए चार नए कियोस्क स्थापित करने के निर्देश मंडी सचिव को दिए।
इन कियोस्क से किसानों को—
पंजीयन
भुगतान जानकारी
फसल बिक्री संबंधित सुविधाएं
आसानी से उपलब्ध होंगी।
दुग्ध उत्पादन में उल्लेखनीय प्रगति
दुग्ध उत्पादन की समीक्षा में अधिकारियों ने बताया कि जिले में इस माह—
5 नई दुग्ध समितियों का गठन किया गया
5 निष्क्रिय समितियों को पुनः सक्रिय किया गया
वर्तमान में जिले में दुग्ध संकलन 17,200 लीटर प्रतिदिन तक पहुंच गया है। कलेक्टर ने इसे एक माह में 18,000 लीटर से अधिक करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
उन्होंने कहा कि दुग्ध उत्पादन ग्रामीण आय बढ़ाने का एक मजबूत आधार है, जिसे सहकारिता के माध्यम से और सशक्त किया जाना चाहिए।
समन्वय से होगा योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन
कलेक्टर हिमांशु चंद्रा ने बैठक के अंत में सभी विभागों को निर्देश दिए कि आपसी समन्वय के साथ योजनाओं का क्रियान्वयन किया जाए। उन्होंने कहा कि योजनाओं का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब वे अंतिम व्यक्ति तक पहुंचें।
नीमच जिले में पीएमएफएमई योजना,
नीमच जिले में पीएमएफएमई योजना, मत्स्य पालन, सहकारिता, फूलों की खेती और दुग्ध उत्पादन को लेकर की गई यह समीक्षा बैठक ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक मजबूत कदम साबित होगी।
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