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ब्यूटी पार्लर वाली दीदी और RSS की खामोश गूंज, जानें कैसे भाजपा ने ममता के किला को ढाहने के लिए बिछाया माइक्रो-कैंपेन का जाल

Posted on May 14, 2026

खास बातें ब्यूटी पार्लर चलाने वाली महिलाएं बनीं अदृश्य सेना भाजपा की साइलेंट एंबेसडर ब्यूटी पार्लर वाली दीदी सीधा संवाद, भरोसे की राजनीति RSS का ‘विस्पर’ कैंपेन : बिना शोर मचाये बदल दी हवा पन्ना प्रमुखों का बुना जाल पॉकेट मीटिंग्स और डिजिटल स्ट्राइक तुष्टीकरण के खिलाफ गोलबंदी ममता की ‘लक्ष्मी भंडार’ की ढूंढ़ ली काट RSS Whisper Campaign Bengal Election: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने सबको चौंका दिया है.

लेकिन भाजपा की इस प्रचंड जीत के पीछे कोई संयोग नहीं, बल्कि जमीन पर की गयी एक बेहद सधी हुई और ‘खामोश’ रणनीति थी. ब्यूटी पार्लर चलाने वाली महिलाएं बनीं अदृश्य सेना तृणमूल कांग्रेस बड़े-बड़े विज्ञापनों और रैलियों में व्यस्त थी, तो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने ‘माइक्रो-कैंपेन’ के जरिये बंगाल के घर-घर में पैठ बना ली थी.

इस रणनीति में ‘ब्यूटी पार्लर’ चलाने वाली महिलाओं से लेकर संघ के अनुशासित स्वयंसेवकों तक ने एक अदृश्य सेना की तरह काम किया. भाजपा की साइलेंट एंबेसडर ब्यूटी पार्लर वाली दीदी भाजपा ने इस बार महिलाओं तक पहुंचने के लिए पारंपरिक रैलियों की बजाय उन जगहों को चुना, जहां महिलाएं खुलकर बात करती हैं.

राज्य भर के हजारों ब्यूटी पार्लरों, सिलाई केंद्रों और छोटे महिला समूहों में भाजपा की महिला कार्यकर्ताओं ने ‘साइलेंट’ कैंपेन चलाया. इसे भी पढ़ें : 75 साल की तपस्या : श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपनों से शुभेंदु अधिकारी के राजतिलक तक, जानें कैसे संघ ने खामोशी से बदल दी बंगाल की सत्ता सीधा संवाद, भरोसे की राजनीति जब महिलाएं पार्लर में आती थीं, तो वहां की संचालिकाएं (जो भाजपा के नेटवर्क का हिस्सा थीं) बहुत सहजता से उन्हें केंद्र सरकार की योजनाओं और ‘अन्नपूर्णा भंडार’ जैसे वादों के बारे में बताती थीं.

इस अनौपचारिक चर्चा ने महिलाओं के मन में बैठे ‘डर’ को खत्म किया और उन्हें भाजपा के पक्ष में वोट करने के लिए प्रेरित किया. बंगाल की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें RSS का ‘विस्पर’ कैंपेन : बिना शोर मचाये बदल दी हवा संघ के स्वयंसेवकों ने इस चुनाव में विस्परिंग कैंपेन (फुसफुसाहट वाली रणनीति) का सहारा लिया.

स्वयंसेवकों ने बड़े भाषणों की बजाय छोटे समूहों में लोगों से मुलाकात की. उन्होंने संदेश दिया कि बंगाल की संस्कृति और सुरक्षा के लिए परिवर्तन क्यों जरूरी है. पन्ना प्रमुखों का बुना जाल हर बूथ पर ‘पन्ना प्रमुखों’ ने यह सुनिश्चित किया कि भाजपा के समर्थक न केवल वोट देने आयें, बल्कि वे मतदान केंद्र तक सुरक्षित महसूस करें.

टीएमसी के ‘बाहरी बनाम भीतरी’ के नैरेटिव को संघ ने स्थानीय स्तर पर लोक-कथाओं और सांस्कृतिक गौरव के जरिये बेअसर कर दिया. इसे भी पढ़ें : शंखध्वनि से गूंजा लोकतंत्र का मंदिर, शुभेंदु ने विधानसभा में की पूजा, विधायकों को परोसा गया मछली-भात पॉकेट मीटिंग्स और डिजिटल स्ट्राइक भाजपा ने इस बार बड़े जनसमूह की बजाय पॉकेट मीटिंग्स पर जोर दिया.

गली-गली में नुक्कड़ सभाएं कीं. 20-30 लोगों की छोटी-छोटी सभाएं की, जहां लोगों के व्यक्तिगत सवालों के जवाब दिये गये. हर इलाके के लिए अलग व्हाट्सएप ग्रुप बनाये गये, जहां स्थानीय समस्याओं और उनके समाधान की बात की गयी. इसने मतदाताओं को महसूस कराया कि भाजपा उनके बेहद करीब है.

RSS Whisper Campaign Bengal Election: तुष्टीकरण के खिलाफ गोलबंदी भाजपा की रणनीति का एक बड़ा हिस्सा धार्मिक और सांस्कृतिक आधार पर मतदाताओं को गोलबंद करना भी था. संघ ने बिना किसी भड़काऊ भाषण के, संदेश को बहुत गहराई तक पहुंचाया कि मौजूदा शासन में बहुसंख्यक समाज की उपेक्षा हो रही है.

इस माइक्रो-लेवल की ब्रांडिंग ने साइलेंट वोटर्स को बूथ तक खींच लिया. इसे भी पढ़ें : हमें अपने बेटे शुभेंदु पर गर्व है : RSS के सरकार्यवाह होसबाले ने बंगाल के मुख्यमंत्री को बताया अपने परिवार का अटूट हिस्सा ममता की ‘लक्ष्मी भंडार’ की ढूंढ़ ली काट ममता बनर्जी की ‘लक्ष्मी भंडार’ जैसी योजनाओं की काट भाजपा ने ‘माइक्रो-कनेक्ट’ के जरिये तलाशी.

यह चुनाव साबित करता है कि अब जीत बड़े होर्डिंग्स से नहीं, बल्कि घर की रसोई और मोहल्ले के पार्लर में होने वाली चर्चाओं से तय होती है. इसे भी पढ़ें सत्ता के शिखर पर तो पहुंच गये शुभेंदु अधिकारी, क्या बन पायेंगे ज्योति बसु और ममता बनर्जी जैसे जननायक? कौन हैं नंदीग्राम के ‘जायंट किलर’ शुभेंदु अधिकारी, जिन्होंने ममता बनर्जी को 2 बार हराया और ढाह दिया टीएमसी का अभेद्य किला बंगाल की राजनीति के ‘गेमचेंजर’ हैं शुभेंदु अधिकारी? नंदीग्राम के नायक से ममता बनर्जी को ललकारने तक, जानें 5 अनकहे सच पनता भात और हिल्सा के शौकीन हैं बंगाल के नये मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी, मां ने खोले नंदीग्राम के लाल के राज.

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