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सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार के CAG ऑडिट आदेश पर रोक लगा दी

Posted on July 3, 2026

Supreme Court : सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के CAG ऑडिट पर फिलहाल रोक लगा दी है. पीटीआई न्यूज एजेंसी के मुताबिक, अदालत ने शुक्रवार को दिल्ली सरकार के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगाई, जिसमें डिस्कॉम के कामकाज और रेगुलेटरी एसेट्स (RA) की जांच के लिए CAG ऑडिट कराने का फैसला लिया गया था.

क्या था दिल्ली सरकार का आदेश दिल्ली सरकार ने गुरुवार (2 जुलाई ) को भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) से बिजली वितरण कंपनियों का विशेष ऑडिट कराने का आदेश दिया था. सरकार का कहना था कि यह जांच की जाए कि आखिर कैसे वर्षों में रेगुलेटरी एसेट्स के रूप में 38,500 करोड़ रुपये की बड़ी राशि जमा हो गई और इसका बोझ उपभोक्ताओं पर डालने की स्थिति कैसे बनी.

STORY | SC halts Delhi govt-ordered CAG audit of power discoms The Supreme Court on Friday stayed the Delhi government's CAG audit of power discoms ordered against the backdrop of a staggering Rs 38,500 crore accumulated over the years as Regulatory Assets (RA) to be recovered… pic.twitter.com/OtmOuOg9JX — Press Trust of India (@PTI_News) July 3, 2026 सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस के.वी.

विश्वनाथन और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की पीठ CAG ऑडिट का सामने आया. खंड पीठ सुनवाई के दौरान दिल्ली इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (DERC) की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और निजी डिस्कॉम कंपनियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने अपनी-अपनी दलीलें पेश कीं.

सभी पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने फिलहाल CAG ऑडिट के आदेश पर रोक लगा दी. किन कंपनियों का होना था ऑडिट दिल्ली सरकार के आदेश के तहत बॉम्बे सबअर्बन इलेक्ट्रिक सप्लाई (BSES), राजधानी पावर लिमिटेड (BRPL), BSES यमुना पावर लिमिटेड (BYPL) और टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन (TPDDL) के कामकाज की जांच होनी थी.

ऑडिट का उद्देश्य यह पता लगाना था कि रेगुलेटरी एसेट्स की राशि क्यों बढ़ती गई और उपभोक्ताओं पर इसका आर्थिक बोझ डालने की नौबत कैसे आई. अब आगे क्या सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद फिलहाल भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG ऑडिट) की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी.

अब मामले की अगली सुनवाई में अदालत यह तय करेगी कि दिल्ली सरकार का ऑडिट कराने का आदेश वैध है या नहीं. इस फैसले पर बिजली कंपनियों, सरकार और लाखों उपभोक्ताओं की नजर बनी रहेगी..

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