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ममता बनर्जी सरकार में जारी सभी नये OBC प्रमाण पत्रों को कलकत्ता हाईकोर्ट ने किया रद्द

Posted on August 12, 2026

Calcutta High Court Cancels All New OBC Certificates: पश्चिम बंगाल में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) से जुड़े प्रमाण पत्रों को लेकर चल रहे लंबे विवाद पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है. जस्टिस राजशेखर मंथा और जस्टिस अनुज सिंह की खंडपीठ (Division Bench) ने बुधवार को तृणमूल कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में लागू किये गये नये नियमों के तहत जारी सभी ओबीसी प्रमाण पत्रों को रद्द कर दिया है.

ओबीसी-ए और ओबीसी-बी कैटेगरी खत्म हाईकोर्ट ने कहा कि पश्चिम बंगाल में अब ‘OBC-A’ और ‘OBC-B’ श्रेणी का विभाजन समाप्त हो चुका है. इसलिए इस व्यवस्था के तहत जारी प्रमाण पत्रों की कोई कानूनी वैधता नहीं रह गयी है. इन प्रमाण पत्रों के धारकों को अब से ‘सामान्य श्रेणी’ (General Category) का ही माना जायेगा.

ये भी पढ़ें: 75 मुस्लिम समुदाय समेत 77 जातियों का ओबीसी दर्जा खत्म, शुभेंदु अधिकारी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से वापस ली याचिका वर्ष 2010 के बाद शुरू हुआ था विवाद पश्चिम बंगाल में वर्ष 2010 के बाद ओबीसी समुदाय को 2 श्रेणियों ओबीसी-ए (OBC-A) और ओबीसी-बी (OBC-B) में विभाजित किया गया था.

तृणमूल कांग्रेस (ममता बनर्जी) के शासन काल के दौरान इन श्रेणियों में प्रमाण पत्रों का वितरण किया गया. इसमें नियमों में धांधली के गंभीर आरोप लगे थे. ओबीसी प्रमाण पत्र जारी किये जाने में फर्जीवाड़ा के आरोप लगने के बाद वर्ष 2024 में कलकत्ता हाईकोर्ट ने 66 समुदायों को ओबीसी सूची से बाहर कर दिया था.

कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल की तत्कालीन ममता बनर्जी सरकार को नये सिरे से सर्वेक्षण कराने का आदेश दिया था. तत्कालीन ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस सरकार ने महज 2,500 नमूनों के आधार पर एक नया सर्वे कराकर 142 जातियों/समुदायों को ओबीसी सूची में शामिल कर दिया.

तृणमूल कांग्रेस सरकार के इस शॉर्टकट और बहुत कम सैंपल वाले सर्वेक्षण पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने आपत्ति जतायी थी. ये भी पढ़ें: बंगाल विधानसभा में ओबीसी आरक्षण से जुड़े 2 बिल पास, 113 समुदाय सूची से बाहर भाजपा सरकार ने वापस ली याचिका, एकीकृत आरक्षण व्यवस्था होगी लागू पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार बनने के बाद राज्य सरकार ने OBC-A और OBC-B के वर्गीकरण को पूरी तरह से समाप्त कर दिया.

पूरे ओबीसी वर्ग के लिए एक ही एकीकृत आरक्षण व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया. इसके साथ ही, शुभेंदु अधिकारी की सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में लंबित उस याचिका को भी वापस ले लिया, जो तृणमूल सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर की थी. इसके साथ ही हाईकोर्ट की खंडपीठ ने साफ कर दिया कि नये नियमों के तहत जारी सभी ओबीसी प्रमाण पत्र अब अमान्य हैं.

ये भी पढ़ें: बंगाल में ओबीसी आरक्षण में बदलाव, शुभेंदु अधिकारी ने कोटा 17 से घटाकर 7 % किया, मुसलमान बाहर भर्ती प्रक्रियाओं में खत्म होगा गतिरोध अदालत के इस फैसले से उन उम्मीदवारों को झटका लगा है, जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद नये नियमों के तहत ओबीसी प्रमाण पत्र हासिल किये थे.

वे अब किसी भी सरकारी नौकरी या शैक्षणिक संस्थान में आरक्षण के हकदार नहीं होंगे और उन्हें ‘अनारक्षित/सामान्य’ श्रेणी में आवेदन करना होगा. हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्पष्ट आदेश से राज्य में लंबे समय से अटकी पड़ी विभिन्न सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रियाओं (Government Recruitment Exams) का रास्ता साफ हो जायेगा..

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