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ममता की 300 रुपए वाली प्रतिज्ञा से उद्योग जगत चिंतित, क्या चुनावी वादे से बंद हो जायेंगे दार्जिलिंग के चाय बागान?

Posted on March 22, 2026

West Bengal Election 2026: ममता बनर्जी की पार्टी अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने बंगाल चुनाव 2026 से पहले चाय बागान श्रमिकों की न्यूनतम दैनिक मजदूरी बढ़ाकर 300 रुपए करने का वादा किया है. इस चुनावी वादे पर उद्योग जगत ने सतर्क प्रतिक्रिया दी है.

मजदूरी तय करने के लिए परामर्श प्रक्रिया जरूरी – उद्योग जगत उद्योग जगत का कहना है कि मजदूरी में किसी भी संशोधन के लिए इस क्षेत्र की नाजुक वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखना चाहिए. नौकरी देने वालों, ट्रेड यूनियनों तथा सरकार को शामिल करने वाली स्थापित परामर्श प्रक्रिया का पालन करना चाहिए.

दीदी की 10 प्रतिज्ञा में चाय श्रमिकों की मजदूरी 250 से 300 रुपए करने का वादा पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए अपने चुनावी घोषणापत्र में सत्तारूढ़ टीएमसी ने चाय बागान श्रमिकों की दैनिक मजदूरी 250 रुपए से बढ़ाकर 300 रुपए करने का संकल्प लिया है. पार्टी ने यह भी कहा कि वह हरी चाय की पत्तियों पर कृषि आयकर की छूट को 2027 तक बढ़ायेगी और बागान श्रमिकों के लिए ‘चा सुंदरी’ आवास योजना जैसी कल्याणकारी पहल जारी रखेगी.

बंगाल की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें बातचीत से तय होता है चाय श्रमिकों का वेतन – टीएआई उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने कहा है कि चाय क्षेत्र में वेतन निर्धारण पारंपरिक रूप से तय बातचीत प्रक्रिया के माध्यम से होता है. भारतीय चाय संघ (टीएआई) के महासचिव पीके भट्टाचार्य ने कहा कि उत्तर बंगाल में मजदूरी तंत्र एक बहु-हितधारक मंच के माध्यम से तय किया जाता है.

उत्तर बंगाल में वेतन, न्यूनतम मजदूरी सलाहकार बोर्ड नामक निकाय द्वारा तय किया जाता है. यह एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है, जिसमें इम्प्लॉयर, सरकार और ट्रेड यूनियन के प्रतिनिधि भाग लेते हैं. पीके भट्टाचार्य, महासचिव, भारतीय चाय संघ कई पहलुओं को ध्यान में रखकर तय होती है मजदूरी भट्टाचार्य ने कहा कि इसमें उद्योग की भुगतान क्षमता, बाजार की स्थिति और लागू प्रावधानों जैसे सभी पहलुओं पर विचार किया जाता है.

इसलिए, उद्योग के रूप में यह आशा की जाती है कि मजदूरी लागू करने से पहले इन सभी पहलुओं पर गौर किया जायेगा. बंद हो रहे दार्जिलिंग के चाय बागान नाम न छापने की शर्त पर दार्जिलिंग चाय उद्योग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पहाड़ियों के कई बागान पहले से ही वजूद बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं.

दार्जिलिंग के 78 चाय बागानों में 7-8 बागान नेपाल से सस्ती चाय की डंपिंग के कारण पहले ही बंद हो चुके हैं. ऐसी स्थिति में मजदूरी में वृद्धि बिल्कुल टिकाऊ नहीं है. अगर लागत का दबाव बढ़ता रहा, तो और भी बागान बंद हो सकते हैं. इसे भी पढ़ें ममता बनर्जी की 10 ‘महा-प्रतिज्ञाएं’: लक्ष्मी भंडार की राशि बढ़ी, बेरोजगारों को भत्ता, जानें दीदी के पिटारे से और क्या निकला बंगाल चुनाव 2026: ममता बनर्जी की महिला ब्रिगेड में टोटो चालक की पत्नी से राष्ट्रपति से सम्मानित किसान तक बंगाल चुनाव 2026: कल्याणकारी योजनाएं बनाम सत्ता-विरोधी लहर, ममता बनर्जी के 15 साल के शासन की सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा ईद के दिन ममता बनर्जी का विवादित बयान- पीएम मोदी को कहा सबसे बड़ा घुसपैठिया, शुभेंदु ने किया पलटवार.

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