मनासा विकासखंड में कलेक्टर के निर्देश पर स्कूलों में पेयजल शुद्धिकरण अभियान, टंकी सफाई व क्लोरीनेशन के दिए निर्देश 1

मनासा विकासखंड में कलेक्टर के निर्देश पर स्कूलों में पेयजल शुद्धिकरण अभियान, टंकी सफाई व क्लोरीनेशन के दिए निर्देश

मनासा | मनासा विकासखंड में कलेक्टर के निर्देश पर स्कूलों में पेयजल शुद्धिकरण अभियान, टंकी सफाई व क्लोरीनेशन के दिए निर्देश विकासखंड मनासा में कलेक्टर श्री हिमांशु चंद्रा के निर्देशानुसार शासकीय एवं निजी विद्यालयों में विद्यार्थियों को शुद्ध और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। इसी क्रम में डी.पी.सी., बी.आर.सी. तथा अन्य शासकीय संस्थाओं के जनशिक्षकों एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) के अधिकारियों की एक आवश्यक बैठक आयोजित की गई।
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बैठक का उद्देश्य विद्यालयों में उपलब्ध पेयजल स्रोतों की स्थिति की समीक्षा करना तथा जलजनित बीमारियों से बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करना रहा। बैठक में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन यंत्री श्री दीपेश वास्पत विशेष रूप से उपस्थित रहे।

विद्यालयों में टंकी सफाई और क्लोरीनेशन अनिवार्य

बैठक को संबोधित करते हुए कार्यपालन यंत्री श्री दीपेश वास्पत ने कहा कि सभी शासकीय एवं निजी विद्यालयों में पेयजल टंकियों की नियमित साफ-सफाई और क्लोरीनेशन किया जाना अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि विद्यालय परिसरों में स्थित पानी की टंकियों की समय-समय पर सफाई की जाए ताकि पानी में किसी भी प्रकार का संक्रमण न पनप सके।

उन्होंने बताया कि गंदे पानी के सेवन से बच्चों में डायरिया, उल्टी-दस्त, टायफाइड जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए पेयजल की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देना अत्यंत आवश्यक है।

शाला प्रमुखों को उपलब्ध करवाई गई क्लोरीन बॉटल

बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि सभी शाला प्रमुखों को उनकी मांग के अनुसार 200-200 सोडियम हाइपोक्लोराइट की क्लोरीन बॉटल उपलब्ध करवाई गई हैं। इन बॉटलों का उपयोग पेयजल टंकियों और अन्य जल स्रोतों के क्लोरीनेशन के लिए किया जाएगा।

शाला प्रमुखों को निर्देशित किया गया कि वे क्लोरीन बॉटलों का उपयोग नियमानुसार करें और जल शुद्धिकरण की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतें।

हैंडपंपों में भी किया जा रहा क्लोरीनेशन

बैठक में यह भी बताया गया कि विद्यालय परिसरों में मौजूद पेयजल स्रोतों, विशेष रूप से हैंडपंपों में, पीएचई विभाग के प्रशिक्षित हैंडपंप टेक्नीशियन द्वारा क्लोरीनेशन का कार्य लगातार किया जा रहा है। इससे यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि बच्चों और शिक्षकों को स्वच्छ एवं सुरक्षित पानी मिल सके।

पीएचई विभाग द्वारा जल स्रोतों की नियमित जांच की जा रही है और जहां भी आवश्यकता है वहां तुरंत सुधारात्मक कार्रवाई की जा रही है।

शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग का समन्वय

इस बैठक में शिक्षा विभाग और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के बीच बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि बच्चों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए दोनों विभागों को मिलकर कार्य करना होगा।

जनशिक्षकों को निर्देश दिए गए कि वे अपने-अपने क्षेत्र के विद्यालयों में पेयजल व्यवस्था की नियमित निगरानी करें और किसी भी प्रकार की समस्या होने पर तुरंत संबंधित विभाग को अवगत कराएं।

बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर प्रशासन गंभीर

कलेक्टर श्री हिमांशु चंद्रा के निर्देशानुसार आयोजित इस बैठक से स्पष्ट है कि जिला प्रशासन बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर पूरी तरह गंभीर है। विद्यालयों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है।

प्रशासन का मानना है कि स्वस्थ विद्यार्थी ही बेहतर शिक्षा ग्रहण कर सकते हैं और इसके लिए सुरक्षित पानी सबसे बुनियादी आवश्यकता है।

नियमित निरीक्षण और रिपोर्टिंग के निर्देश

बैठक के अंत में अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि पेयजल टंकी सफाई और क्लोरीनेशन की प्रक्रिया की नियमित रिपोर्ट तैयार कर उच्च अधिकारियों को भेजी जाए। इसके साथ ही, भविष्य में भी इस प्रकार की समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएंगी ताकि व्यवस्था को और अधिक मजबूत किया जा सके।

इस अभियान से मनासा विकासखंड के विद्यालयों में अध्ययनरत हजारों विद्यार्थियों को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल का लाभ मिलेगा, जिससे उनके स्वास्थ्य में सुधार होगा और जलजनित बीमारियों की आशंका कम होगी

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