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प्रदेश में नैक की तर्ज पर गठित करें सैक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव | युवा वर्ष के लिए उच्च शिक्षा सहित संबंधित विभाग करें आवश्यक तैयारी महाविद्यालयों में कृषि पाठ्यक्रम को लोकप्रिय बनाने का कार्य सराहनीय मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उच्च शिक्षा क्षेत्र में उपलब्धि

Posted on June 4, 2026

HTML clipboard मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में उच्च शिक्षा की आवश्यकता के अनुसार नए महाविद्यालय प्रारंभ किए जाएं। जिन सघन आबादी वाले क्षेत्रों में महाविद्यालय संचालित हैं, वहां विद्यार्थी संख्या बढ़ने पर शिक्षण में शिफ्ट व्यवस्था भी लागू करने पर विचार किया जाए।

राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) की तर्ज पर राज्य परिषद अर्थात सैक के गठन की कार्यवाही प्रारंभ की जाए। रोजगार परक पाठ्यक्रमों पर फोकस किया जाए। आने वाला वर्ष युवा वर्ष होगा, इस नाते अन्य संबंधित विभागों के साथ विद्यार्थियों के हित में नए कार्यक्रमों और प्रकल्पों को लागू करने की तैयारी भी की जाए।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में कृषि के स्नातक पाठ्क्रम की व्यवस्था सुनिश्चित कर इस विषय को लोकप्रिय बनाने के प्रयासों पर हर्ष व्यक्त किया। उन्होंने कृषि पाठ्यक्रम से प्रदेश के लगभग 20 हजार से अधिक विद्यार्थियों को जोड़ने की सफलता के लिए उच्च शिक्षा विभाग को बधाई भी दी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरूवार को मंत्रालय में उच्च शिक्षा विभाग के कार्यों की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में उच्च शिक्षा मंत्री श्री इंदर सिंह परमार, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय श्री नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा श्री अनुपम राजन सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उच्च शिक्षा में गुणवत्ता में निरंतर सुधार के कदम उठाए जाएं। पीएमश्री महाविद्यालयों में भी इस दिशा में ठोस प्रयास किए जाएं। अन्य सभी शासकीय महाविद्यालयों में भी शिक्षण और अन्य गतिविधियों का सुचारू संचालन होता रहे, इस पर ध्यान दिया जाए।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नए पाठ्यक्रमों को प्रारंभ करने की दिशा में हुए कार्यों की जानकारी प्राप्त की। बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश में इंदौर, उज्जैन और चित्रकूट में तीन वर्षीय विमानन पाठ्यक्रम बीबीए प्रारंभ किया गया है। विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में भारतीय ज्ञान परम्परा प्रकोष्ठ की स्थापना की गई है।

प्रदेश में 384 शोध केंद्र संचालित हैं। गत वर्ष 83 नए शोध केंद्र प्रारंभ किए गए। आने वाले समय में 100 शोध केंद्र स्थापित होंगे। सकल नामंकन अनुपात (जीईआर) में प्रदेश ने भारत के 1.1 प्रतिशत की वृद्धि के मुकाबले 1.8 की वृद्धि करने में सफलता प्राप्त की है।

इसी तरह गत ढाई वर्ष में नेशनल लॉ इन्स्टिट्यूट यूनिवर्सिटी में 27वीं और डीएवीवी इंदौर ने 49वीं रैंक प्राप्त की है। प्रदेश की तीन अन्य उच्च शिक्षण संस्थाओं को भी नेशनल इन्स्टिट्यूशनल रैंकिंग फ्रेम वर्क (एनआईआर एफ) द्वारा श्रेष्ठ व्यवस्थाओं के लिए सराहा गया है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि छिन्दवाड़ा के राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय में अच्छे विषयों का समावेश करें। इसके लिए राज्य सरकार आवश्यक आर्थिक सहयोग देगी। विशेष रूप से खाद्य प्रसंस्करण, आर्किटेक्चर और कृषि विज्ञान के कोर्स के लिए व्यवस्था की जाए। विद्यार्थियों की रूचि के अनुरूप नए पाठ्यक्रम प्रारंभ किए जाएं।

विभाग की प्रमुख उपलब्धियाँ बैठक में बताया गया कि उच्च शिक्षा विभाग सूचना प्रौद्योगिकी का अधिक से अधिक उपयोग कर रहा है। स्वयं पोर्टल पर उपलब्ध पाठ्यक्रमों में पंजीयन के कार्य में मध्यप्रदेश ने जुलाई 2025 में 3 लाख 52 हजार 931 पंजीयन कर देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है।

जुलाई 2026 के सेमेस्टर में यह संख्या 2 लाख 73 हजार 266 हो गई है। प्रदेश में गुना, खरगौन और सागर में नए विश्वविद्यालय और आगर मालवा में लॉ कॉलेज प्रारंभ किया गया। प्रदेश के 8 महाविद्यालयों में 28 विषयों में पीजी कक्षाएं प्रारंभ की गईं। प्रदेश के 618 उच्च शिक्षण संस्थान भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के “वन नेशन-वन सबक्रिप्शन” पोर्टल पर पंजीयन करवा चुके हैं।

इस पोर्टल का प्रदेश के 8 लाख से अधिक विद्यार्थी और शोधार्थी उपयोग कर चुके हैं। प्रदेश इस कार्य में भी देश में प्रथम है। मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में 5 हजार फैकल्टी और स्टॉफ को प्रशिक्षण देने के साथ ही मनोबल सत्र में 71 हजार 705 विद्यार्थी भागीदारी कर चुके हैं।

जुलाई से मार्च तक तीन चरणों में कैलेंडर जारी कर अकादमिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन सुनिश्चित किया गया है। प्रदेश में भारतीय ज्ञान परम्परा और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन के विशेष विशेषज्ञों की समितियां भी गठित की गईं। प्रदेश में 55 शासकीय महाविद्यालयों का प्रधानमंत्री कॉलेज और एक्सीलेंस के रूप में उन्नयन कर विभिन्न सुविधाएं बढ़ाई गई हैं।

प्रमुख नवाचारों में 10 संभागीय मुख्यालयों पर डिजिटल स्टूडियो शुरू हुए हैं। ई ज्ञान सेतु चैनल के माध्यम से ई-कंटेंट उपलब्ध करवाया जा रहा है जिसमें हिन्दी के साथ क्षेत्रीय भाषाओं बुंदेली, बघेली और मालवीय के ई-कंटेंट भी शामिल हैं। ई-प्रवेश के लिए मोबाइल एप की शुरूआत और सार्थक एप से उपस्थिति की जानकारी प्राप्त की जा रही है।

समर्थ सॉफ्टवेयर पर विश्वविद्यालयों को जोड़ा गया है। प्रदेश के 8 महाविद्यालयों में एवीजीसी लेब स्थापित की जा रही है। यह लेब एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स के कार्यों में सहायक है। आईआईटी दिल्ली के सहयोग से 68 महाविद्यालय एआई कोर्स का संचालन कर रहे हैं।

गैर हिन्दी भारतीय भाषाओं में अध्ययन की व्यवस्था के लिए प्रक्रिया प्रारंभ की गई है। साधना सप्ताह में आईजीओटी कर्मयोगी पोर्टल पर उच्च शिक्षा विभाग ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए प्रदेश में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रमुख निर्देश महाविद्यालय और विश्वविद्यालय में रोजगार परक पाठ्यक्रम के संचालन पर जोर हो।

पार्ट टाइम महाविद्यालय संचालित किए जाएं। प्रातः और शाम की शिफ्ट में कॉलेज चलाए जा सकते हैं। आवश्यकता के अनुसार सांदीपनि विद्यालयों के भवन में भी महाविद्यालय संचालित करें। कक्षा 12वीं उत्तीर्ण करने वाले विद्यार्थियों के लिए कॉउंसलिंग की भी व्यवस्था हो।

खाद्य प्रसंस्करण, आर्किटेक्चर और कृषि विज्ञान सहित अन्य वोकेशनल विषयों के अध्ययन के लिए महाविद्यालयों में आवश्यक व्यवस्था की जाए।

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