पुरी रथ यात्रा: भारी भीड़ के बीच दो श्रद्धालुओं की मौत, आज फिर मिलेगा रथ खींचने का मौका

मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) के मुताबिक, रथ यात्रा के दौरान सात श्रद्धालुओं की तबीयत बिगड़ गई, जिन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया. इनमें 60 साल से अधिक उम्र के एक श्रद्धालु की इलाज के दौरान मौत हो गई. अधिकारियों का कहना है कि उनकी मौत की सही वजह का पता लगाया जा रहा है.

वहीं, एक दूसरी घटना में 35 साल से अधिक उम्र के एक श्रद्धालु को अचानक दिल का दौरा पड़ा. डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन इलाज के बावजूद उनकी जान नहीं बच सकी. मुख्यमंत्री कार्यालय के मुताबिक, बारिश की वजह से जिन श्रद्धालुओं की तबीयत बिगड़ी थी, उनका अस्पताल में इलाज किया गया और हालत में सुधार होने पर उन्हें छुट्टी दे दी गई.

दिनभर भारी भीड़ और लगातार बारिश के कारण कई लोगों को थकान, शरीर में पानी की कमी, घुटन और अन्य मामूली स्वास्थ्य समस्याएं हुईं. हालांकि, राज्य सरकार का कहना है कि रथ यात्रा पूरी तरह शांतिपूर्ण और बेहतर व्यवस्था के साथ संपन्न हुई. सरकार ने यह भी साफ किया कि कार्यक्रम के दौरान भगदड़ या भीड़ प्रबंधन पूरी तरह फेल होने जैसी कोई घटना नहीं हुई.

देश-विदेश से करीब 8 से 9 लाख श्रद्धालु शामिल हुए रथ यात्रा में अधिकारियों के मुताबिक, प्रशासन, सुरक्षा एजेंसियों, सेवादारों और स्वयंसेवकों ने मिलकर व्यवस्था संभाली, जिससे श्रद्धालुओं का आना-जाना बिना किसी बड़ी परेशानी के चलता रहा. पूरे आयोजन के दौरान हालात सामान्य रहे और सभी जरूरी सेवाएं सुचारु रूप से काम करती रहीं.

मुख्यमंत्री कार्यालय ने बताया कि इस साल पुरी की वार्षिक रथ यात्रा में देश-विदेश से करीब 8 से 9 लाख श्रद्धालु शामिल हुए. ये भी पढ़ें: Puri Rath Yatra 2026: श्रद्धालुओं को कनेक्ट रखने के लिए एयरटेल का मास्टरस्ट्रोक, पूरे ओडिशा में 5G नेटवर्क हुआ सुपरफास्ट ‘बड़ा डंडा’ मार्ग पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ गई फायर सर्विस के महानिरीक्षक (Inspector General) उमाशंकर दाश ने बताया कि रथ यात्रा के दौरान ‘बड़ा डंडा’ मार्ग पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ गई थी.

इसी रास्ते से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के रथ श्री गुंडिचा मंदिर तक ले जाए जाते हैं. उन्होंने कहा कि भीड़ में दम घुटने और तबीयत बिगड़ने वाले करीब 100 श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकाला गया. इसके बाद उन्हें अस्थायी अस्पतालों और एम्बुलेंस तक पहुंचाया गया, जिससे समय पर इलाज मिल सका और उनकी हालत में सुधार हुआ.

तीनों देवता शुक्रवार रात भी रथों पर ही रहेंगे प्रशासन के मुख्य प्रशासक अरबिंद पाढ़ी ने पत्रकारो से कहा कि अनुष्ठानों में बिल्कुल भी देरी नहीं हुई, लेकिन ‘पहंडी’ प्रक्रिया में एक घंटे से अधिक की देरी हुई. भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा मुख्य द्वार पर करीब 40 मिनट तक आगे नहीं बढ़ सकी, जिसके कारण ‘पहंडी’ में देरी हुई.

उन्होंने बताया कि रथ खींचने की प्रक्रिया शुक्रवार सुबह साढ़े नौ बजे फिर शुरू होगी और देवता रातभर रथों पर ही विराजमान रहेंगे. पाढ़ी ने कहा कि तीनों देवता शुक्रवार रात भी रथों पर ही रहेंगे, जबकि गुंडिचा मंदिर में प्रवेश का जुलूस शनिवार को आयोजित किया जाएगा..

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