ओडिशा: बाढ़ में 5 दिन पेड़ से लटके रहे सुंनंदा, कैसे बची जान? समझें शरीर का ‘सर्वाइवल मोड’

ओडिशा के भद्रक जिले के बलिपाटना गांव के 35 वर्षीय सुंनंदा बेहरा बाढ़ के तेज बहाव में बह गए थे. इसके बाद वह पानी में डूबे एक ताड़ के पेड़ को पकड़कर करीब 5 दिन तक टिके रहे. बाढ़ प्रभावित इलाके से गुजर रहे ग्रामीणों ने उन्हें देखा और इसकी जानकारी ओडिशा डिजास्टर रैपिड एक्शन फोर्स (ODRAF) को दी.

इसके बाद उनका रेस्क्यू किया गया. बचाव के समय सुंनंदा काफी कमजोर थे और उनके हाथ-पैर कांप रहे थे. सुंनंदा का इतने लंबे समय तक बाढ़ के पानी के बीच जीवित रहना असाधारण है. लेकिन ऐसे मामले यह समझने का मौका देते हैं कि खतरे में इंसानी शरीर और दिमाग खुद को जिंदा रखने के लिए किस तरह प्रतिक्रिया करते हैं.

खतरा महसूस होते ही शरीर हो जाता है एक्टिव वैज्ञानिकों के मुताबिक, खतरा महसूस होने पर शरीर में एक्यूट स्ट्रेस रिस्पॉन्स शुरू होता है. इसमें सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम सक्रिय हो जाता है और शरीर खुद को खतरे से निपटने के लिए तैयार करता है. इसे आम तौर पर ‘फाइट, फ्लाइट या फ्रीज’ प्रतिक्रिया कहा जाता है.

इस दौरान एड्रेनालिन जैसे हार्मोन की भूमिका होती है. दिल की धड़कन और सांस लेने की गति बढ़ सकती है और मांसपेशियों को ज्यादा ऊर्जा मिलती है. दिमाग का अमिग्डाला खतरे से जुड़ी प्रतिक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. यानी खतरे के समय शरीर सामान्य स्थिति की तरह काम नहीं करता, बल्कि उसकी प्राथमिकता तुरंत खुद को सुरक्षित रखना बन जाती है.

कई दिनों तक संकट रहे तो शरीर ऊर्जा बचाने लगता है एड्रेनालिन और तत्काल तनाव प्रतिक्रिया इंसान को कई दिनों तक नहीं चला सकती. अगर लंबे समय तक भोजन नहीं मिलता, तो शरीर पहले से जमा ऊर्जा का इस्तेमाल करना शुरू करता है. लंबे समय तक भोजन की कमी रहने पर शरीर ऊर्जा के लिए फैट और फिर दूसरे ऊतकों का इस्तेमाल कर सकता है.

बाढ़ के पानी में रहना शरीर के लिए बड़ी चुनौती लगातार पानी में रहने की अपनी अलग चुनौती होती है. NOAA के मुताबिक, पानी शरीर से गर्मी हवा की तुलना में करीब 25 गुना तेजी से निकाल सकता है. इसलिए ठंडे पानी में लंबे समय तक रहने से शरीर का तापमान तेजी से गिर सकता है और हाइपोथर्मिया का खतरा बढ़ सकता है.

सुंनंदा के मामले में इसके अलावा कई दिनों तक पेड़ को पकड़े रहना, लगातार पानी के संपर्क में रहना और शरीर को एक ही स्थिति में बनाए रखना भी अतिरिक्त शारीरिक दबाव रहा होगा. ये भी पढ़ें: बंगाल की खाड़ी में डूबा पनामा-फ्लैग वाला जहाज, इंडियन नेवी का रेस्क्यू ऑपरेशन जारी ‘सर्वाइवल मोड’ में दिमाग पूरी तरह बंद नहीं होता मुश्किल हालात में सिर्फ शरीर ही नहीं, दिमाग भी लगातार स्थिति के मुताबिक प्रतिक्रिया करता है.

खतरे के दौरान डर और तनाव से जुड़ी मस्तिष्क की प्रक्रियाएं व्यक्ति को तेजी से प्रतिक्रिया करने में मदद करती हैं. शोध में अमिग्डाला को खतरे और डर से जुड़ी प्रतिक्रियाओं में महत्वपूर्ण माना गया है. ऐसी स्थिति में व्यक्ति के लिए यह तय करना महत्वपूर्ण हो सकता है कि कहां टिके रहना है, ऊर्जा कैसे बचानी है और किस तरह खतरे से बचना है.

हालांकि, लंबे समय तक तनाव का असर सोचने और निर्णय लेने की क्षमता पर भी पड़ सकता है. ये भी पढ़ें: सोते-सोते मुस्कुराता है आपका नन्हा बच्चा? जानें क्या होती है इसके पीछे की असली वजह शरीर और दिमाग मिलकर बढ़ाते हैं बचने की संभावना सुंनंदा बेहरा की घटना यह दिखाती है कि बेहद कठिन परिस्थितियों में इंसानी शरीर कई स्तरों पर खुद को बचाने की कोशिश करता है.

तनाव की तत्काल प्रतिक्रिया, ऊर्जा का इस्तेमाल और बचाने की कोशिश, मानसिक स्थिति और आसपास के वातावरण सभी इसमें भूमिका निभाते हैं. हालांकि, किसी व्यक्ति के इतने लंबे समय तक जीवित रहने की वजह सिर्फ एक ‘सर्वाइवल मोड’ नहीं होती. स्थिति, पानी का तापमान, शरीर की हालत, भोजन-पानी की उपलब्धता, चोट, मानसिक स्थिति और बचाव तक पहुंचने का समय जैसे कई कारक मिलकर तय करते हैं कि कोई व्यक्ति कितने समय तक जीवित रह सकता है..

इस खबर को शेयर करें:

WhatsAppFacebook
mawafirstnews@gmail.com

Published by
mawafirstnews@gmail.com

Recent Posts

कलेक्टर की अध्यक्षता में समय-सीमा बैठक संपन्न

सेवा संकल्प अभियान में विभागीय समन्वय के साथ गतिविधियों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें—कलेक्टर कलेक्ट्रेट…

15 hours ago

कलेक्टर श्री चंद्रा ने जनसुनवाई में सुनी 65 आवेदकों की समस्याएं

कलेक्टोरेट सभाकक्ष नीमच में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में कलेक्टर श्री हिमांशु चंद्रा ने जिले…

15 hours ago

नवम राष्ट्रीय पोषण माह के अंतर्गत पोषण जागरूकता एवं नशा मुक्ति जागरूकता कार्यक्रम संपन्न

आयुष विभाग अंतर्गत शासकीय आयुर्वेदिक औषधालय पिपल्या रावजी द्वारा आंगनवाड़ी केंद्र क्रमांक-2 बर्डीया जागीर एवं…

15 hours ago

अवैध रेत एवं खनिज परिवहन-भंडारण पर कलेक्टर की सख्ती

जिले में अवैध खनन, खनिजों के अवैध उत्खनन, परिवहन एवं भंडारण पर प्रभावी अंकुश लगाने…

15 hours ago

अवैध शराब से संबंधित सूचना आबकारी नियंत्रण कक्ष को दें

कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी श्री हिमांशु चंद्रा के निर्देशानुसार आबकारी विभाग नीमच द्वारा जिले के…

15 hours ago

पूर्व जवानों के सम्मान संग सीआरपीएफ नीमच में वेटरन्स-डे एवं वार्ब बैठक सम्पन्न

ग्रुप केंद्र, सीआरपीएफ, नीमच के महाराणा प्रताप भवन में मंगलवार को श्री सुरेन्द्र कुमार, उप…

15 hours ago